Friday, November 26, 2021

काम में आनंद की अनुभूति।

क्या काम करना ठीक है और क्या करना ठीक नहीं है ? 


यह के जटिल मुद्दा है क्योंकि एक ही काम किसी स्थिति में ठीक होता है तो किसी में खराब । तो इसका निर्णय कैसे करें।

इसका कोई एक सटिक स्केल तो नहीं है, लेकिन हाँ अगर एक चीज को हम स्केल मान लें तो काफी हद तक हम इस उलझन से बाहर आ सकते हैं। 


और वो स्केल है "आनंद की अनुभूति" अर्थात की अगर हम यह सुनिश्चित कर लें कि किस कार्य को करने से हमें पूरी तरह से  आनंद प्राप्त होता है और एक चीज और जोड़ लें कि जो कार्य हम कर रहे हैं उससे किसी व्यक्ति या वस्तु का डायरेक्ट या डायरेक्ट किसी भी तरह से कोई नुक्सान नहीं है तो वह कार्य सबसे अच्छा कार्य है, फिर उस काम को करने में हमें कितना भी समय लगे यह कोई चर्चा का विषय नहीं रह जाता। 

लेकिन समस्या कुछ और है, और वो ये है कि जिस काम को करने में हमें आनंद की अनुभूति होती है उसी काम से कुछ दिन बाद चिड़चिड़ाहट होने लगती है, और हम दूर भागते हैं। 

तो मतलब ये कि, कौन सा काम ठीक है और कौन सा नहीं ये कोई मुद्दा नहीं है बल्कि मुद्दा ये है कि जिस काम को हम कर रहे हैं उसमें निरन्तर उत्साह कैसे बनाये रखें।

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