Wednesday, July 17, 2019

Imaginations VS Excitements

Power of our Imagination and Excitements.

Friends we must know  the reality of
"Imagination and Reality".

हम अक्सर सुनते आये हैं की Mind के दो part होते हैं

 1:-Concious
 2:- Unconcious.
                                 

Concious Mind, Unconscious Mind को Information देता है और Unconscious Mind उस Information को Reality में बदल कर , Physical World में ला खड़ा कर देता है।

Firends जरा गहराई से सोचिये  कि अगर हम Inner World में कुछ इस तरह से Create कर दें ( कुछ इतने पावर से सोचें ) की हम उसे पा चुके हैं ।

अब जरा गहराई से ये सोचें कि जो हम पा चुके हैं, जो चीज मेरा है उसे देखने में कोई Attraction होगी क्या?

तो उत्तर मिलेगा नहीं!
Definatilly नहीं होगी।

लेकिन अगर कभी भी जो हमारा सपना है, जो हमारा Dream है उसे देख कर अगर Excitement आता है तो समझ लीजियेगा की हमारा Mind अभी तक हमारे सपने को Unconcious Mind तक पहुचाया नहीं है, हमें अपना Dream और अच्छे से Visualise करने की जरूरत है।

Example लेते हैं :- मान लीजिए कि कोई Singer बनाना चाहता है, और उसने किसी को Stage पर Live गाते हुए देखता है तो उसके मन में क्या चलना चाहिए, अगर उसके मन में ये चल रहा है कि "वाह क्या Singer है, मुझे इसके जैसा बनाना है।"  बहोत ज्यादा Excited हो रहा है, पागलपन छाया जा रहा है तो समझ लेना चाहिए कि सामने वाले का Dream अभी Subconcious Mind में नहीं गया है, वह बाहर बाहर ही अपने सपने के साथ जी रहा है, क्योंकि अगर सपना ऐसा हो जाये जैसे कि वो Real लगने लगे, पूरी तरह से अपना लगने लगे तो फिर Excitment खत्म हो जाता है और वो सपना बहोत जल्द Reality में बदलने वाला होता है।


तैयारी जीत की

                           तैयारी जीत की


कीमत पानी की नहीं प्यास की होती है,
मिलेगा सब कुछ इसी जिंदगी में साहब, कीमत चुकानी तो सपनों और आस की होती है।

Friend's
 जीत हमेशा से उसी की होती है जो तैयारी के साथ आते हैं, किसी भी Successful आदमी को देखिए वो अपने life में चाहे जितनी भी ऊचाई पर पहुच जाए लेकिन तैयारी और Practice हमेशा से करते हैं और खुद को Upgrate करने का मौका कभी नहीं छोड़ते।
चाहे हम बात करें:-
विराट कोहली की,
अमिताभ बच्चन की,
मार्क जुकरबर्ग की,
या सूंदर पिरचय की

ये सभी लोग अपने फील्ड में बहोत Successful हैं लेकिन हर काम से पहले तैयारी भरपूर करते हैं।


जरा इस बारे में सोचें कि अगर
हम बिना पढ़े ही Exam देनें चले जाएं तो क्या होगा?
अगर एक खिलाड़ी बिना Practice के Ground में चला जाये तो क्या होगा?
अगर एक Businessmen बिना Presentation के Seminar में चला जाये तो क्या होगा?
शायद सभी स्थिति ठीक नहीं होगी, वैसी नहीं होगी जैसी होनी चाहिए।

   कहते हैं न कि जीत तो हमेशा मैच के आखरी बॉल पर ही होती है लेकिन खेल में फेंके गए हर एक बॉल की अपनी कीमत होती है।

हमें हर समय कोशिश और तैयारी करनी है जीत की एक दिन वो आखरी बॉल भी हमारे खाते में होगी जो हमारी जीत को संबोधित करेगी।


Monday, June 10, 2019

सदा कृतज्ञ रहें।

दोस्तों, आज मैं बड़े दिनों के बाद मंदिर आया हूँ , विश्वास था की भगवान के दर्शन होंगे, मन हल्का और खुश हो जाएगा,और हुआ भी, सब हुआ बस मन हल्का नहीं हुआ, क्योंकि ये मुझे मालूम है की लोग यहाँ कुछ ना कुछ मांगने आये हैं अपनी समस्याओं को सुलझाने की कामना करने के लिए आये हैं, बड़ी आस लेकर आये हैं। मुझे भी कुछ समस्या है लेकिन क्या मांग लेने से समस्या दूर हो जाएगी-शायद नहीं।
जरा सोचिए कि:-
◆क्या ये काफी नहीं कि हमें इंसान का जीवन मिला है,
◆क्या ये काफी नहीं कि हमारा स्वास्थ अच्छा है,
◆क्या ये काफी नहीं की हमारे सगे सम्बन्धी हमारे साथ हैं,
◆क्या ये काफी नहीं कि कुछ लोग हमें सच्चे दिल से प्यार करते हैं,
◆क्या ये काफी नहीं कि जिसे हम कभी कभी दुःखी कर देते हैं फिर वो हमसे अटूट विश्वास बनाये हुए हैं,
◆क्या ये काफी नहीं कि हम हंस,बोल और चल सकते हैं,
◆क्या ये काफी नहीं की हमारा कोई गुरु है जो बिना किसी स्वार्थ के हमें आगे बढ़ने के बारे में सोचते हैं,
◆अरे क्या ये काफी नहीं की शाम में देर से घर जाने पर माँ इन्तेजार करती है,
◆क्या ये काफी नहीं कि उदास होने पर कुछ दोस्त मजाक उड़ा कर सब कुछ भुला देते हैं,
◆ क्या ये काफी नहीं कि हमारी हर छोटी बड़ी गलती को छुपाने के लिए हमारी बहन हमेशा साथ देती है,
◆ क्या ये काफी नहीं कि कोई हमें बेइंतहां प्यार करता है चाहे कितनी भी कमियां क्यों ना हों हमारी।

सच्चे दिल से अपनी आत्मा की आवाज सुनकर ये बताइये क्या अब भी हमें भगवान से कुछ मांगने की जरूरत है या सच्चे दिल से धन्यवाद बोलने की जरूरत है।
●क्या आज हम अपने भगवान से अपनी गलतियों के लिए माफी मांगे,
●क्या आज हम अपने भगवान को याद करके उनसे भी सच्चे दिल से माफी मांग लें जिसका कभी दिल दुखाये हों,
●क्या आज हम खुद से खुद के लिए माफी मांग लें,
●क्या आज हम आज आराम सर बैठकर खुद के खुद का हाल चाल पूछें,
● क्या आज हम खुद को ढूंढ लें जिसे कहीं भूल गए हैं,

दोस्तों एक बात जरा गौर से सोचिये की अगर सच में भगवान आपके सामने आ जाएँ और आपको कुछ मांगना हो तो क्या मांगोगे, शायद शब्द नहीं हैं आपके पास, कुछ समझ में नहीं आएगा क्या मांगे? क्या बोलें? क्या कहें? लेकिन फिर भी मंदिर में मांगते ही हैं, ईश्वर भी सोचते होंगे क्या बना कर भेजा था, सब कुछ तो दिया जो ये सहन कर सकता है फिर भी परेशान है और अगर कुछ और पाने की इच्छा है तो अपनी योग्यता ना बढाकर मुझसे मांगने ही आया है।

दोस्त शुक्रियादा करें उस भगवान का जिसने हमें इतना कुछ दिया है। और मांगना है तो ये क्यों ना मांगे की :-

●भगवान हमें शक्ति दीजिये की आज मेरे मुख से कुछ भी ऐसा ना निकले की जिससे किसी को ठेस पहुंचे।
●भगवान हमें वो शक्ति दें जिससे हम खुद को और इस समाज को एक नई दिशा दे सकें।
● भगवान हमें शक्ति दीजिये की हम जीते जी और इस दुनिया से जाने के बाद भी किसी के काम आ सकें।
हमें कृतज्ञ होना चाहये उस ईश्वर के लिए जिसके वजह से हम सब है। कहते हैं ना की ऊपर वाले की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता तो हम क्या चीज हैं ।



"जो भी मैं लिखा हूँ ये मेरी भावनाये हैं ,मेरी अपनी विचारधारा है,मेरा इरादा किसी के भावनाओ को ठेस पहुंचाने का नहीं है। अगर आपको कुछ गलत लगे तो माफ् कीजिएगा क्योकिं मैं ये सारी बातें अपने दिल के आवाज़ पर लिखा हूँ।"




Saturday, June 1, 2019

क्या सच्चाई जानना सच में जरूरी है?



Friend's हम सभी एक चीज के पीछे हमेशा से रहते हैं और वो है सच्चाई को जानने की ललक।

ये मेरा POST हो सकता है आपको Emotional कर दे, और ये भी हो सकता है कि आपको कुछ नई चीजों से मिला दे।
Friend's
इस ब्लॉग को लिखने का मेरा Moto बस इतना है कि हम झूठ और सच के भवर में फसकर जितनी आसानी से बहोत कुछ खोते और छोड़ते जा रहे हैं, उससे खुद को कैसे बचाएं और सही चुनाव करें।
                   हम सभी के Life में हर पल कुछ न कुछ अच्छा या बुरा होते रहता है, हम अपने आप पास के लोंगो के विचारों से, अपने संबंधियों के विचारों से, अपने खास लोंगो के विचारों से घिरे रहते हैं, उनमे से कुछ लोग सच बोलते हैं तो कुछ लोग झूठ बोलते हैं लेकिन मजे की बात ये है कि सभी को सच सुनना पसंद है चाहे वो क्यों न हमेशा झूठ बोलता हो।

हमारे Family Member हों, दोस्त हों या फिर Life Partner. हमलोग सभी से सच की उम्मीद करते हैं हमें यह विश्वास होता है कि ये मेरे हैं और मुझसे कभी भी झूठ नहीं बोलेंगे।


कहीं हमारा सच बोलना या सुनना घातक ना हो जाये।

 जब हम कुछ छुपाते हैं तो इस विश्वास के साथ कि आज हम जो छुपा रहे हैं-झूठ बोल रहे हैं वो Future के लिए अच्छा होगा
और ये सच भी है कि कभी-कभी कुछ छुपाना हजारों गुना सही होता है सच बोलने के।
◆मान लीजिए कोई बच्चा है, जिस परिवार में वह बच्चा रहता है वो उसका परिवार नहीं है, और उसे इस सच्चाई के बारें में पता चल जाये तो शायद उस परिवार और बच्चा दोनों के लिए ही वह समय एक दुर्घटना से कम नहीं होगी।
◆आज का समय ऐसा है कि एक पिता अपने पुत्र से ये छुपाता है कि वो परिवार के लिए कैसे और कौन सा काम करके पैसे लाता है, पिता यह सोचकर सच्चाई छुपाता है शायद कहीं ये जान गया कि मैं कोई छोटा काम करता हूँ तो ये मुझसे नफरत करेगा और अपने दोस्तों के सामने खुद को छोटा समझेगा।
◆एक माँ अपनी बेटी से ये छुपाती है कि कैसे वो उसके पिता से बताये बिना, छुपाकर कुछ पैसे उसे देती है और बाद में उसे जलील होना पड़ता है।
◆एक लड़की अपने बीते दिनों की घटनाएं छुपाती है सिर्फ इस वजह से की कहीं उसे उसके परिवार से, उसके दोस्तों से, उसके अपनो से तिरष्कार ना मिलने लगे।
◆एक लड़का अपनी असफलता को छुपाता है कि कहीं उसे समाज में, उसके अपने घर में बेइज्जत ना किया जाए।

आज हमारे समाज में लोग इस बात की उम्मीदें बहोत रखने लगे हैं कि हमारा बच्चा बहुत ही समझदार और सच्चा है। परिवार के बड़ों को यही लगने लगा है कि हम सब जो सोचेंगे वही मेरा बच्चा/बच्ची करेगी। और बच्चों के साथ उनके स्कूल में, कॉलेज में बहोत सी बातें होती हैं  को बहुत सी परेशानियां होती है और ऐसा होने के बाद भी वह अपने मन की बात घर में नहीं बताते, और जब सच्चाई सामने आती है तो सभी बड़े बोलते हैं कि हमें पहले सब कुछ सच सच क्यों नहीं बताया। लेकिन सच्चाई ये है कि घर के लोग सच सुनते ही कुछ ऐसा करते जो कि बच्चे और Family दोनों के लिए ही सही नहीं होता। यही कारण है कि आज बहोत से Talented लोग गुमनाम जिंदगी जी रहे हैं।

●बात अगर Relationship की करें तो हम बहोत ज्यादा सिरियस होते हैं हर छोटी से छोटी चीज के बारे में जनाने के लिये, शायद उस Time पर हम Life की सबसे बड़ी जिम्मेदारी इसी को मान लेते हैं कि हमें सब कुछ सच और साफ-साफ जानना है। सामने वाले के बारे में मुझे सच्चाई जाननी है, उसके Past के बारे में उसके Present के बारे में Any Thing ,Every Thing. वो सब जानने की कोशिश करते हैं जिसका हमारे Life से सीधा connection हो या ना हो। विडंबना ये है कि जब हम सब कुछ जान लेते हैं और हमें कुछ बुरा लगता है तब ना ही उस रिश्ते को छोड़ना चाहते हैं ना Accept करना, हमें खुद नहीं पता होता कि जो हमारी उत्सुकता थी सच्चाई जानने की उसका Main Moto क्या था, हम कुछ Decision लेना चाहते थे या केवल Satisfaction के लिए ऐसा किये? और क्या सब कुछ जानने के बाद हमें Satisfaction मिला ?

मैं एक Question अक्सर पूछता हूँ कि:-
अगर आपका बच्चा आपको ये बताये की आज उसने अपने Friend के कॉपी से देख कर Exam Paper दिया है तो आप उससे नाराज होंगे और हो सकता है तो उसे Punish भी करेंगे - मैं पूछता हूँ कि आप उसे Punish क्या इसलिए करेंगे क्योंकि उसने Exam में Copy की है या फिर इसलिए क्योंकि आज वह सच बोला है।

हम Relationship में आज सौदा करने उतर गए हैं बातें ऐसी करती हैं जैसे कि Market से कोई सामान खरीदने गए हैं और उसके बेकार निकल जाने की पूरी संभावना है।
        आज हम कहाँ हैं, किस Mind Set के साथ जी रहे हैं हर एक रिश्ता आज सौदा सा देखने में लगता है, वो प्यार कहीं खोता जा रहा है जो कभी Unconditional था, 90% से ज्यादा लोंगो का Heart केवल जीने के लिए एक Instrumental के तरह काम आ रहा है Feeling जैसे खत्म होते जा रही है, हम न चाहते हुए भी किसी पर सक करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं, और इसका Reason है Negative Mind का होना।

मैं इस Topic के साथ जिस निचोड़ पर पहुँचा हूँ उससे ये समझ आता है कि Problem ये है कि सामने वाला मेरा अपना जितना ज्यादा Close है और उतना ही रिस्ता बिगड़ने की संभावना है। और हम जिससे जितना दूर हैं उससे उतना ही रिलैक्स हैं।
आइये समझने की कोसिस करते हैं:-

हम रोज TV देखते हैं उसमें कई तरह के ADD आते हैं और उस ADD में हमारे प्यारे हीरो या हेरोइन होती हैं जो की हमें Products के बारे में हमें बताते हैं और कभी ऐसा भी होता है कि उस Product की Quality अच्छी नहीं होती लेकिन हम अपने पसंदीदा हीरो या हेरोइन से नफरत नहीं करते बल्कि उनकी नई पिक्चर आने पर देखने भी जाते हैं।
लेकिन अगर हमारे साथ रहने वाला कोई अपना हो जो हर सुख-दुःख में हमारा साथ देता है और अगर उसने हमसे कुछ झूठ बोल दिया, क्यों न वो झूठ हमारे लिए अच्छा हो लेकिन हम बर्दास्त नहीं करते।

मेरे खयाल से इसका एक One Point Solutions ये है की या तो हम रिश्तों में बहोत दूरी बना लें या फिर प्यार इतना हो कि झूठ सच को भुला कर सामने वाले के इरादे (Intenstion) को समझने की कोशिस करें।

ये TOPIC बहोत Special और Important अगर आपका कोई सुझाव हो तो Please शेयर करें।



Thursday, May 30, 2019

Change Yourself Don't Try to Others.


Friends हम अपने दुःख के लिए हमेशा किसी दूसरे को Responsible मानते हैं और सुख के लिए खुद को।
जब कोई हमें हंसाएगा तब हसेंगे जब कोई रुलाएगा तो रोयेंगे, हम अपनी Feeling को बिल्कुल मारते चले जा रहे है।

कहीं न कहीं हम हमेशा किसी दूसरे को ही Change करने में लगे हैं, शायद इसलिए क्योंकि हम बाहरी दुनिया से ज्यादा Connected हैं बजाय अंदरूनी दुनिया के। हम अपनी खुशियों की चाभी किसी और को दिए हुए हैं, कोई दूसरा हमारे साथ कैसा व्यवहार कर रहा है इसी पर हमारी खुशी हमारा दुख सब Depend है।

●सामने वाला कैसा व्यवहार करेगा ये Depend करता है कि हमारा image उस इंसान के सामने कैसा है, अगर वो हमें महत्वपूर्ण समझता है तो Respect से बात करेगा, सामान्य इंसान समझेगा तो Normal बात करेगा और अगर घटिया इंसान समझेगा तो बुरा व्यवहार करेगा, और इसी कारण से सामने वाले कि बात हमें Effect करती है और हम खुश या दुखी होते हैं।
हमेशा से ये कहा जाता है कि अगर हम अपना Respect  करेंगे तो लोग भी हमारा Respect करेंगे। अब बहोत ही Deeply समझने की जरूरत है कि Selfrespect किसे कहते हैं।

●Friend's Selfrespect (खुद को इज्जत देना) को हम Maximum Time ego से जोड़कर देखते हैं, जब हम अपने काम को करते समय Selfrespect को नहीं छोड़ते तो लोग हमारे बारे में यही सोचते हैं कि इसके में EGO है,और शायद हम भी दूसरों के बारे में ऐसा ही सोचते हैं जब वो खुद को इज्जत देता है। फिर बात और भी बिगड़ते चली जाती है। तो इसका सही इलाज क्या है?- हम खुद को कैसे खुश रखें ऐसा क्या करें कि हम खुद के कंट्रोल में रहें, अपनी खुशी, अपना दुःख, अपना Emotion अपने विचार से हम खुद को Drive करें।
                             

1:-Selfrespect
2:-Ego

हमें इन दोनों के बारे में बहोत बारीकी से और आराम से सोचने-समझने की कोसिस करनी चाहिए।

◆Selfrespect मतलब की हम अपनी तो इज्जत करें लेकिन उससे किसी को ठेस ना पहुँचे।

◆Ego का मतलब है कि हम अपने को इतना Special समझने लगे कि किसी दूसरे को क्या Feel होता है, उसे क्या अच्छा लगेगा या क्या बुरा इसका ध्यान न रखते हुए हम अपना काम किये जा रहे हैं या काम करने का ढोंग कर रहे हैं।

●Friend's जब हम आपकी इज्जत करते हैं तो हम दूसरों की भी इज्जत करते हैं और उस Time पर हम ये समझ लेते हैं कि सामने वाला हमें कितना Control कर पा रहा है और अगर ये बात समझ आ गयी तो हम ये भी समझ सकते हैं कि क्या सच मे सामने वाले कि बात हमें दुःखी करने वाली है?
 सामने वाले के बात का खुद पर कितना Effect होना चाहिए ये हम खुद Deside करते हैं।
                                

"हम खुद को Control कर सकते हैं हमें अपनी खुशी के लिए किसी और पर Depend होने की जरूरत नहीं होगी।"

Friends मैंने एक चीज Notice की है, कभी-कभी हम सब अपने Birthday पर इस लिए दुःखी हो जाते हैं क्योंकि हमारा सबसे अच्छा दोस्त हमें Wish नहीं किया या हमारे पापा, या मम्मी, या भाई, या बहन नें हमें Wish करने में late कर दिये या भूल गए।
हमें ये समझना होगा कि किसी का Wish करना या किसी का हमारे लिए कुछ अच्छा बोलना एक आशीर्वाद है और अगर आशीर्वाद भी हम आने तरीके से लेने की कोशिश करने लगे तो उस आशीर्वाद में Feel कहा रह जायेगा फिर तो सब कुछ Artificial लगेगा ना।

फिर उसमें वो रस कहा रहेगा, वो विश्वाश कहा रहेगा, वो प्यार कहाँ रहेगा। हमें अपने एक एक Moment को, अपनी Feel के साथ जीना होगा और अगर उसमे कोई सम्मिलित हो जाये तब तो बहोत ही अच्छी बात होगी और खुशी कई गुना बढ़ जाएगी
है ना।



Tuesday, April 16, 2019

Students Problem> "Students have no more focus on living the life".

What is the mean of living the life ?
जीवन को जीना किसे कहते हैं?
                                    
◆ क्या है जीवन? 
◆ जीते कैसे हैं? 
These are two different things..

हम हमेशा यह सुनते आए हैं कि जीवन में बहोत उथल - पुथल है, हार और जीत ही जीवन है लेकिन क्या सच में ऐसा है?
अच्छा हो जाना या कुछ बुरा हो जाना Both are part of life, हम सब इस बात को मानते भी हैं लेकिन जब परिस्थिति बदलती है तो हम परेशान हो जाते हैं, कभी-कभी संभल जाते हैं तो कभी बिल्कुल टूट जाते हैं, इसका Reason कहीं न कहीं हमारा Association है,
हम Life को Real में समझ नहीं पाए हैं।

हम एक Social Person हैं। हमारी Life बहोत सी चीजों से मिलकर बनी है, Drive हो रही है लेकिन Student Life Period में हमें Proper इन चीजों की जानकारी नहीं होती है,
Dear Studets आइये उन चीजों को समझने की कोशिश करते हैं जिससे हमारी लाइफ Drive हो रही है।

◆ Our Health (हमारा स्वस्थ)
◆ Our Family (हमारा परिवार)
◆ Our Teachers (हमारे गुरु)
◆ Our Society (हमारा समाज)
◆ Our Culture (हमारी संस्कृति)


Let's try to see your self and analyse on above given points.
Where I Am?
See yourself and calculate!
How many percentage you are contributing to build on
HEALTH, 
FAMILY, 
TEACHER, 
SOCIETY & 
CULTURE

If you take an examination than how many marks you will give yourself?
"एक महान Writer ने कहा है कि जीवन जीना एक कला है, कला ही नहीं तपस्या है"

Let's Analyse the points:-
OUR HEALTH :-

                                      
                      
आज के Life Style के According, Students Health को बहोत ही lightly ले रहे हैं, इस बात का कोई care नहीं है कि आज जो कुछ भी हम खा रहे हैं उससे हमारे Health में आने वाले कुछ वर्षों में क्या होने वाला है, ना Proper Diet की जानकारी है ना ही Proper Exercise करने का Time, आज Students Social Media पर इतना Active हैं कि देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोना यह एक Fashion हो गया है या यूं बोले तो Youth Life Style हो गई है।
                            

(मैं एक चीज को Personaly Indicate करना चाहूंगा की आज-कल खाने में बहोत हॉट चीज के साथ Cold Drink पीने का Fashion चला है जो की Really में Health के लिए बहोत ही घातक है।Dear Students please सtop these style of eating.)

FAMILY :-  अपने आज तक के Life के Base पर और कुछ लोंगो के Life को analyse करने पर ये समझ आया की हमारी Family को छोड़कर लगभग हर जगह हमारा Use होता है, बिना किसी फायदा का हमें कोई जगह नहीं देता। वह Job हो Business हो या Friends हों, हमारे Life में जो स्थान Family का है उसके बराबर में कोई Relation नहीं है।
जरा गहराई से सोचें तो हमारे Parent's हमें एक अच्छी Life देने के लिए सब कुछ गवाने को तैयार हैं, वो अपना घर, अपनी जमीन, अपने सपने, सब कुछ छोड़कर, भुलाकर हमेशा इस बारे में सोचते हैं कि मेरे बच्चे को कोई तकलीफ ना हो, जितना हो सकता है वो कोशिश करते हैं।और हम हमेशा कमियां निकलते हैं।
बोलते हैं:-
अच्छे जगह Admission नहीं दिलाया,
हमें महंगे कपड़े नहीं दिलाये,
कैसे पापा हैं एक Cycle नहीं दिला सकते,
एक Bike नहीं दिला सकते,
एक Laptop नहीं दिला सकते,

हम कितने गंदे तरीके से उन्हें बोल देते हैं। मां को कैसे धुत्कार देते हैं, जो हमारे खुशी  के लिए आने सारे सपने भूला दी हैं, अपने से आगे हमें रखती हैं।
उस भाई को कितने गंदे से बोल देते हैं जो हमारे लिए पूरे दुनियां से दुश्मनी लेने को तैयार हो जाता है, बिना कुछ सोचे हमारे लिए अपने आप को चोट पहुचा लेता है , सबसे लड़ जाता है।
उस बहन से अच्छे से बात भी नहीं करते जो हमें हमेशा अपने बच्चे की तरह प्यार दुलारी करती है, हमारे एक एक चीज को ध्यान में रखती है, हमारी गलतियों को छुपाती है, हमें गलत करने से हमेशा रोकती है और कभी-कभी हमें बचाने के लिए अपने आप को सजा दिलाती है, और हम उससे सीधे मुँह बात तक नहीं करते।

अगर खुद से पूछने तो कहाँ हैं हम??
हम अपने Family को कुछ खुशियां देने में-अरे खुशियां देना तो दूर हम Students ठीक से पढ़ाई नहीं कर रहे हैं ना खुद के लिए न उनके लिए, अगर हम कुछ किताबें नहीं पढ़ पा रहे हैं अपनी family को खुश करने के लिए कितने गिरे हुए हैं हम! अपनी Life  को बेरंग किये हुए हैं हम।
                            
                                     
Our Teacher:- 
                              Dear Students इस दुनिया में केवल 2 लोग हैं जो हमें अपने से ज्यादा Success देखना चाहते हैं वो हैं हमारे Parents & Teacher  लेकिन एक ही Person ऐसा है जो हमें Real में आगे बढ़ने के लिए हर संभव प्रयास करता है। और वो है हमारे Teacher,
हो सकता है हमें वो पसंद न आये, हो सकता है कि उसका तरीका हमें पसंद न आये। लेकिन ये More Than 100% सच है कि हमारे Teacher हमेशा हमें आगे बढ़ाना चाहते हैं लेकिन दुर्भाग्य है कि आज Teacher को एक Employee से ज्यादा कुछ नहीं समझा जा रहा है, आज Teacher बच्चों को घर तक जाकर पढ़ने को तैयार हैं कि शायद इससे बच्चों को पढ़ाई के लिए ज़्यादा समय मिल सके, लेकिन इसका मतलब कुछ और निकाल लिया गया है, बच्चे अपने Teacher को वो Respect नहीं दे रहे हैं जितना उनको मिलनी चाहिए। जितना कि वो Deserve करते हैं।
आज सबके Mind में एक Questions है कि अगर हमारे Teacher में सच में Quality है तो वो खुद क्यों नहीं Doctor, Engineer, IAS बन गए?
कुछ बच्चे सोचते हैं कि मेरे  Father के पास बहोत पैसे हैं इसीलिए वो Teacher को घर बुला लेते हैं और हमारे Teacher केवल पैसे के वजह से घर पर आते हैं।

जरा सोचिये भगवान राम अपने गुरु के आश्रम में जाकर पढ़ाई करते थे। गुरु खुद राजा नहीं थे लेकिन वो भगवान को एक कुशल राजा बनाने की शिक्षा देते थे, क्या भगवान राम के पिता जी के पास पैसे नहीं थे की वो Teacher को घर बुला लें, लेकिन उन्होंने भगवान राम को भी शिक्षा के लिए गुरु के पास भेजा और भगवान को भी एक गुरु की जरूरत थी लेकिन आज हम इतने Smart हो गए हैं की शायद Google के आगे किसी को कुछ समझ ही नहीं रहे हैं।
                       

जो हमें Direction दे रहा है, जो हमारा गुरु है आज हम उसे कुछ नहीं समझ रहे हैं, जो हमारे लिए अपने Life को दांव पर लगा दिया है, जो दिन रात हमारे Grouth के बारे में सोचता है उसे हम नजर नदाज करके चले जाते हैं, उसे इज्जत देकर अच्छे से Namaste भी नहीं करते और कभी कभी तो इतने गिर जाते हैं कि अपने Teacher की कमियां निकलते हैं, उससे जबान लड़ाते हैं और मन में सोचते हैं कि "क्या आता है इसे! बेकार है ये"
Friends एक बात याद रखनी चाहिए हमें की जब जब हम अपने गुरु का, अपने Teacher का अपमान करेंगे, Insult करेंगे, उसके ऊपर सवाल लगाएंगे तब तब हम अपने Life में नीचे गिरेंगे।
आइये आज कसम लें "हमारे गुरु जो भी हैं-जैसे भी हैं-इस दुनिया में सबसे पहले वो हैं, हम अपने जीवन में आज तक जिससे भी कुछ भी सीखें हैं, जैसे भी सीखें हैं हमेशा उन्हें अपना Teacher के जैसा ही सम्मान देंगे, हमेशा उनका आदर करेंगे, हमेशा सीर झुकाकर उनको प्रणाम करेंगे और अपनी गलतियों के लिए मन ही मन हम उनसे छमा मांगते हैं।


To be continue for next point 
SOCIETY & CULTURE.......

Friday, April 5, 2019

Students Problem>" Students are very serious about the results".

Students are very serious about the result 

INTEREST ABOUT RESULTS CREATE TENSION, 90% times!!

हम लगभग 90% Time अपने Result के बारे में सोच कर परेशन रहते है।
और Maximum Blame किसी दूसरे पर डालते हैं:-
जैसे -
Parents पर
Teachers पर
हमारे पर Lap Top होता तो ये कर देते,
हमारे पास bike होती तो ये कर देते,
एक अच्छी Mobile होती तो वो कर देते,

हम जितना Expectation दूसरों से रखते हैं, उसका 10% भी खुद से नहीं रखते, एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर सोचिये की
क्या हमें जो पढ़ना था वो पढ़ा ?
जो हमारा Book है उसे हम वैसे पढ़े जैसे कि पढ़ना था?
Noted बनाये Proper?
तो शायद सामने ये आएगा की नहीं हमने 10% - 20% भी ऐसा नहीं किया,
                                         

अगर हमारा Result 90% है तो 95% क्यों नहीं आया, ये सोचकर और आगर 80% है तो 90% क्यों नहीं आया ये सोचकर परेशान हैं, और अगर Fail हो गए तो 40% वाले को देखकर, बहोत परेशान है, Actualy इन सबकी हालत एक जैसी ही है, हमारी Life क्यो एक कागज के पन्ने पर सिमट गई है, अगर 95% आया तो और 40% आया तो हम  ही उसके जिम्मेदार हैं, No one other are responsible for this.

 ध्यान से देखो "NOTHING IS END IN THE LIFE" हमारे पास Chance है सब कुछ सुधारने का।

आज FAMILY, SOCIETY और
MEDIA, Pass और Fail को इतना बड़ा Topic बना दिये हैं कि Studetns इसे ही अपनी life मान चुके हैं,
बहोत सारे Examples हैं जो लोग Fail होने के बाद भी दुनिया मे अपना नाम रोशन किये

1-Mr. Abdul Kalam had failed many times,
2-Amitabh Bachhan had failed as like he was on the road,
3- Siddhartha become BUDDHA when he was lost every thing.

क्या उनकी Life खत्म हो गई थी? नहीं शायद उनका Fail हो जाना ही उनके ये वरदान हो गया, एक चीज Clear कर दूं कि Top करने वाला हमेशा Tension में रहता है और उसे अपनी Positions को खोने का डर हमेशा ही रहता है Society में, Family में School में और खुद के नजरों में भी, मैं ये नहीं कहता की आप
कम Marks आने पर दुखी नहीं होना,
परेसान नहीं होना ,
बल्कि खूब रोलो परेशान हो लो, चिल्ला लो, लेकिन एक कसम लो खुद से की ये आंसू अब नहीं बहेंगे, ये Time फिर कभी भी Repeat नहीं होगा, और अगर बहोत अच्छे Marks आते हैं तो Marks से इतना नहीं चिपको की
उसके बिना Life अधूरी लगने लगे, Fail & Pass is part of life, हमेशा Aim इतना बड़ा बनाओ की Life ki chhoti चीजें हमें बिगड़ने या बनाने से हम Distracred ना हों।



To be continue.. Students problem>
"Students are in pressure by Parents Teachers & Relatives." In next blog.