Wednesday, November 27, 2019

Are you in tension?



आज और अभी, अभी मतलब की जिस घंटे, मिनट और सेकण्ड में आप इस ब्लॉग को पढ़ रहे हैं उस Time पर आपके मन में क्या चल रहा है?
थोड़ा देर रुकिये,पढ़िए नहीं.................सोचिये।

क्या चल रहा है आपके मन में, शायद कुछ भी नहीं, ना कुछ अच्छा, ना कुछ बुरा, ना ही कोई Image. सब कुछ शांत है अब जरा ध्यान से सोचिये क्या आप किसी बात से दुःखी हैं जो कि अभी हो रहा हो? क्या आप अभी और इस Time के किसी घटना से दुःखी हैं?- नहीं बिल्कुल नहीं, आप अभी बिल्कुल शांत हैं। इसका मतलब ये है कि अगर आप किसी बात से दुःखी हैं, परेशान हैं, तो उसका कारण केवल और केवल हमारा बिता हुआ कल है और आप अभी इस वक्त पूरी तरह से सचेत हैं, Concious हैं, और Silent हैं।

दोस्त, हमारा बीता हुआ कल हमारे आज के और हमारे आने वाले कल दोनों के समय को खत्म कर रहा है। ना आज जीने दे रहा है ना ही कल को अच्छा बनाने में हमें मदद कर रहा है, बल्कि हमारे सोचने और समझने की शक्ति को कमजोर करते जा रहा है।
बीते हुए कल को आप बदल नहीं सकते और आने वाले कल की कोई Guarantee नहीं है, बस आप आने वाले कल की एक Image बना सकते हैं, एक Direction देने की कोशिश कर सकते हैं, आज जो आप कर रहे हैं वही कल को निर्धारित करेगा।

Upset हैं, दुःखी हैं, परेशान हैं, ये बातें बीते हुए कल के वजह से है या हम जो Future के बारे में सोच कर जी रहे हैं उसकी वजह से है, लेकिन सबसे Important है कि हम जो आज कर रहे हैं, सोच रहे हैं, महसूस कर रहे हैं उससे हमारा कितना Development हो रहा है।

अगर हम Develop कर रहे हैं ना तो Future अपने आप Bright हो जाएगी, बस इतना ही हो सकता है कि जैसा आप सोचें हैं वैसा हूबहू ना हो।

Thursday, November 21, 2019

आप अपने सोच के मालिक हैं या गुलाम?


अपने सोच का गुलाम बनाना :- मतलब की जब हम वो सब करते हैं जो हमारे दिमाक में आता है तब हम अपने सोच के गुलाम होते हैं, क्योंकि तब हम उस काम के Right Or Wrong होने के बारे में नहीं सोचते, उस काम से Society को होने वाले फायदे या नुकसान में बारे में नहीं सोचते, बस कर देते हैं। जैसे कि अगर हम Highway पर अपनी गाड़ी से हैं तो यू ही मन करता है कि गाड़ी तेज चलायें, और हम 100-150 की Speed में गाड़ी भगाने लगते हैं, ऐसे ही Maximum Students होते हैं, जब मन किया पढ़ लिया नहीं मन किया नहीं पढ़ा। आज कल नशा करना Maximum Youngsters के लिए आम बात हो गया है Mind में आया कि बस Start कर दिये। ऐसा केवल इस लिए है क्योंकि हम जाने अंजाने में अपने सोच के, अपने मन के गुलाम हो गये हैं। 

कुछ ऐसा ही हम रिश्तों में भी करते हैं अपने Life Partner के साथ करते हैं, जो दिल में आया बोल दिए, जैसे मन हुआ वैसा व्यवहार कर दिये, ऐसे ही हम अपने घर के बच्चों के साथ करते हैं। जिंदगी के हर पहलू पर Maximum Time हम वही करते हैं जो Mind में आ गया।

अपने सोच का मालिक बनना:- जब हम अपने सोच के मालिक होते हैं तब हम सुलझे हुए और समझदार होते हैं, कुछ भी करने से पहले हर एक चीज से होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में सोचते हैं।
हमें क्या पढ़ना चाहिए, क्या खाना चाहिए, किससे मिलना चाहिए, किससे नहीं मिलना चाहिए, कहाँ जाना चाहिए, कहाँ नहीं जाना चाहिये, क्या,कैसे और कितना काम करना चाहिए ये सब कुछ सोच समझ कर करते हैं।
●अब बात ये आती है कि अपने सोच के मालिक कैसे बनें?
 सबसे पहले खुद को समय देना शुरू करें, खुद से बात करने (Self Talk) की कोशिश करें, कुछ भी बोलने से पहले कुछ Second के लिए रुकें, सोचें, फिर बोलें। कुछ करने से पहले कुछ Minute के लिए सोचें, अगर ना समझ में आये तो जिसे आप अच्छा समझते हैं उससे राय लें,
किताबें पढ़ें या Videos के माध्यम से जानकारी लें।

विश्वास कीजिये कुछ दिनों के अंदर बदलाव होना शुरू हो जाएगा और आप एक बेहतरीन इंसान बन जाएंगे।

Love Or Attractions With Works.

If you have not interest- then you can't do the best.

हर वो चीज़ जिसमें आपका पूरा दिल और दिमाक लगता है, जिस काम को किये बिना आपका मन नहीं मानता, अगर वो न करें तो कुछ भुला-भुला सा लगता है, तो समझ लीजिए दोस्त की आपको अपने काम से बेहद प्यार है वो Study, Dance, Music, Sports Etc. कुछ भी हो सकता है।
लेकिन अगर आपको अपने काम में Interest नहीं है तो उसमें आप चाहे जितना भी कोशिश क्यों न कर लें कभी भी आप अपना Best नहीं दे सकते।

We driven by two things LOVE and ATTRACTION.

केवल यही दो चीजें ही हमें Drive कर रही हैं।
जिस चीज से हमें प्यार होता है उसमें हम पूरी तरह से डूबे रहते हैं जैसे :-
●Music से प्यार है तो आप उसमें Best कर सकते हैं, जैसे की A.R. Rehman ने किया।
●सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट से प्यार है, आज वो भारत रत्न हैं।
और आपको किस काम से प्यार है ? जरा सोचें।

अगर हमें अपने काम से केवल Attraction है तो उस काम में हम कभी भी अपना दिल और दिमाक नहीं लगा सकते।
हमें Real Love क्या चीज से है इसे ढूंढना कठिन हो जाता है या यूँ कहें कि हमें इसके बारे में कोई ख्याल नहीं है कि काम से सच्चा प्यार होना किसे कहते हैं।

सच्चाई तो ये है कि हमें अपने आप से ही प्यार नहीं है तो अपने काम से क्या प्यार होगा। हम खुद को हर समय कोसते रहते हैं, छोटा महसूस करते रहते हैं हर वो कमी जो हमारे अंदर है उसे हम हमेशा Focus करते हैं। आप छोटे हो,मोटे हो, काले हो, बहोत गोरे हो, बहोत लंबे हो जो कुछ भी हो अपने माँ से पूछना की जब आप इस दुनियाँ में आये थे तो उनके लिए- उस पल के लिए- उस Time पर सबसे खूबसूरत इंसान कौन था?
यार Believe yourself अगर आप खुद को Underestimate करते हैं तो आप Nature का विरोध कर रहे हो, आप उस Supreme Power को Value नहीं दे रहे हैं जो हम सबको चला रहा है, और अगर आप अपने काम को प्यार नहीं कर रहे हो तो ऊपर वाले के द्वारा दिये गए Opportunity का विरोध कर रहे हो।

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपको किस काम से प्यार है तो जिस दिन आपमें अपने काम को करते हुए किसी दूसरे काम को करने के लिए मना करने की हिम्मत आज जाए समझ लेना कि आपको अपने काम से सच्चा प्यार हो गया है, और यही चीज आपको TOP पर लेे जाएगी।


"If you are underestimate yourself it means you dislike the top creation of god. Start love yourself the world will love you much than you."

Saturday, October 26, 2019

अपने अंदर एक दीप जलाएँ।





आज के दीवाली में क्या कुछ नया करने वाले हैं आप लोग, शायद सब कुछ वही तो नहीं जो पिछले साल किया था।

क्यों ना आज एक दीप अपने अंदर भी जलायें, दोस्त हम सब जितना खुद को समझते हैं उतना कोई नहीं समझता, जितना खुद को जानते हैं उतना कोई नहीं जानता।

                  एक बात 100% सच है कि हम जाने या अंजाने में किसी ना किसी को कभी ना कभी दुःखी तो किये ही होंगे, तो आइए आज उनसे सच्चे दिल से माफी माँगे, अगर बात करके माफी माँग सकें तो बहोत अच्छा है लेकिन शायद ये करना कठीन होगा। आइये अपनी आंखें बंद करके जिसे कभी दुःखी किये हैं उसे याद करें और मन ही मन उनसे माफी मांगे।
Believe कीजिये मन बहोत हल्का हो जाएगा, आँसू भी गिरे तो गिरने दीजियेगा, हो सकता है दिन भर थोड़ा थोड़ा आंसू गिरे तो गिरने दीजियेगा, करके देखिए! अंदर एक दीप जरूर जलेगा।
 "और जिन लोंगो ने हमारी सहायता की है उन्हें भी मन ही मन धन्यवाद दीजिये।"

आइये मिलकर दीपावली मनाएं
अपने अंदर एक दीप जलाएँ।





Wednesday, October 23, 2019

क्या आपको नहीं लगता???

हम अपने life में कुछ ज्यादा ही Artificial Activity में Involve हो गए हैं।

क्या आपको नहीं लगता?
जब किसी बच्चे का जन्म दिन पड़ता है तो उसे इस बात का इन्तेजार होता है कि आज अधिक से अधिक लोग उसे Wish करें, हो सकता है कि बच्चा किसी बात से नाराज हो फिर भी वो इस इन्तेजार में होता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग उसे Whatsapp, Facebook जैसे Social Sites पर Wish करें, और ये केवल बच्चों की नहीं है बल्कि बड़े लोंगो की भी स्थिति यही है।
कुछ लोग तो इस बात से नाराज हो जाते हैं कि आज मेरे दोस्त ने, मेरे Relative नें मुझे Good Morning Wish नहीं किया, कुछ लोग इस बात से डरे रहते हैं कि अगर मैं आज अपने दोस्त को Wish नहीं किया तो वो नाराज हो जाएगा भले ही वो खुद किसी बात से बेहद उदास क्यों ना हों।

जब भी आपको किसी रिश्ते को निभाने के लिए अपने Mind का इस्तेमाल करना पड़े, सोच कर कोई Planing करना पड़े तो समझ लेना कि वो रिस्ता गहरा नहीं
क्योंकि रिश्ते दिल से जुड़ते हैं दिमाक से नहीं।




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Monday, October 21, 2019

Learn Right or Wrong?


एक बात हमेशा हमें परेशान करती है और वो है, सही और गलत का चुनाव करना। हमारे लिए सही चीज का चुनाव करना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि एक सही फैसला हमारें जीवन को सुधार सकती है और एक गलत फैसला हमारे जीवन को बर्बाद कर सकती है। और कभी-कभी हमारी यही सोच हमें आगे बढने से रोकती भी है।
जब हम कुछ सीखने जाते हैं या कुछ नया करने जाते हैं तो इस बात का बहुत ध्यान देते हैं कि कहीं हम कुछ गलत न सिख लें और इसी में फस कर हम कुछ भी नहीं सिखाते, जब ऐसी बहुत सी चीजें होती है जिसे की हम थोड़ा गलत भी सिख कर सही के काफी नजदीक पहुच सकते हैं।

आइये इसे एक उदाहरण से समझते हैं :- 
मान लीजिये की एक बच्चा है और उसे गणित सीखना है,अब किसी (Teacher) A ने इसे बताया कि 5+5=10 होता है,
(Teacher) B ने बताया कि 5+5=11 होता है,
और किसी ने बताया कि पहले और दूसरे में से कोई एक गलत बताता है।
अब दो Situation सोच कर इस बात को बारीकि से समझते हैं कि क्या होता है,
First Situation :-
मान लीजिये की जो बच्चा है उसे कोई पहले ही बता दिया कि एक Teacher गलत बताता है और वह बच्चा ये सोच कर पढ़ने ही नहीं जाता कि मैं गलत सिख लूँगा। और वो कुछ भी नहीं सीख पाता।
Second Situation:- 
मान लीजिए की वो बच्चा गलत सिख लिया कि 5+5=11 होता है, तो एक बात तो ठीक है कि उसने गलत सीखा लेकिन जब उसे सही पता चलेगा कि 5+5=10 होता है, तो उसे ये भी पता चलेगा कि क्या-क्या जोड़ने पर 11 होता है, उसे ये भी पता चलेगा कि 11,10 से बड़ा नंबर है, उसे ये भी पता चलेगा कि 5 कौन सा नंबर है। उसे जोड़ने का तरीका आ जायेगा, उसे बहुत कुछ सिखने को मिलेगा।

 कुछ ऐसा ही हमारे लाइफ में भी हो रहा है, हम कुछ भी नया  करने से पहले डर जाते है
● इस डर से की कहीं कोई गलती हो गई तो।
● इस बात से की कहीं हम Fail हो गए तो।
● इस बात से की कहीं हमारी Insult हो गई तो।

◆क्या जब हम छोटे थे तो गलती नहीं करते थे?
◆क्या जब हम बच्चे थे तो Fail नहीं होते थे?
◆क्या जब हम नादान थे तो हमारी Insult नहीं होती थी?

चलिए आज एक कदम आगे बढ़ते हैं कुछ नया सीखने को! 
चलिए आज एक कदम बढ़ाते हैं कुछ गलती करने को।

Saturday, September 21, 2019

Really Truth is Important?

ऐसी हमारे आपके जीवन में तमाम घटनाएं होती हैं जब हम सच और झूठ के भवर में फसकर बहोत कुछ खो देते हैं या किसी के जीवन के साथ जाने अंजाने में अन्याय करते हैं।
जरा समझने का कोशिश करते हैं।

                             

◆ अगर किसी लड़की की शादी होने से पहले ही किसी कारण वश टूट गयी हो, और उसकी दूसरी शादी होने वाली हो और कोई पिछली बातें सच-सच सबको बता दे तो क्या होगा? शायद ये शादी भी टूट जाएगी, जरा सोचने वाली बात है अगर इसे ही सच्चाई कहते हैं तो ये कितना सही है, चुनाव आपको करना है कि ये कितना ठीक है, बहुतों की जीवन में ऐसी घटनाएं होती हैं, बहोत सी ऐसी सच्चाई होती है, जिसके सामने आने से किसी की Life बर्बाद हो सकती है, मैं इन चीजों को नहीं लिख सकता लेकिन आप इस बात को अपने Life से, दूसरों के Life  से Connect करके सोच सकते हैं, देख सकते हैं, सिख सकते हैं।

◆ Thomas Edison जब बच्चे थे तो उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, उनकी Teacher उनके घर वालों को एक पत्र लिखती हैं उसमें लिखा था कि:-

 "हमें यह सूचित करते हुए बहुत खेद हो रहा है कि Thomas Edition की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और ये स्कूली शिक्षा लेने योग्य बालक नहीं है अतः Thomas को इस School से निकाला जाता है, हमें ऐसा करने से बेहद दुख है लेकिन हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है।"

Thomas की माता जी इस पत्र को पढ़ कर बहोत दुःखी हुईं और बेटे के पूछने बोलीं:-
" बेटा इस पत्र में लिखा गया है कि Thomas एक बहोत ही Extra Ordinary Student है और हमारे School में इतने योग्य Teacher नहीं हैं जो Thomas को पढ़ा सकें। इसलिए इस बच्चे को प्राम्भिक शिक्षा घर पर ही दी जाए।" और इसके बाद Thomas Edison की मां बहोत रोयीं लेकिन Thomas समझ नहीं पाए कि उनकी माँ क्यों रो रही हैं और उसके बाद उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनकी उनके घर पर ही उनकी माँ से मिली। और ये पत्र  Thomas की माँ के निधन के बाद मिली जब वो Young हो चुके थे।
आज पूरा विश्व Thomas Edition को जनता है

 हम सच-झूठ की भवर जाल में फसे हैं दूसरों को नीचे दिखाने की कोशिश में, छोटी-छोटी बातों को क्लियर करने में, हम कैसे व्यवहार करते हैं?:- "मुझे सच्चाई जानना है।" और सबको पता है कुछ अच्छा नहीं होने वाला कुछ भी जानकर। किसी बात की सच्चाई जानने से ज्यादा Important है कि सच्चाई के महत्व को समझने की कोशिश करें।
हम जितना दूसरों के बारे में सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं उसका 10% भी अपनी सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं रखते। ये 100% सच है, अगर ऐसा नहीं है तो एक बार फिर से अपनी Life के पुराने पन्नो को ध्यान से देखें।

Finally बात ये आती है कि क्या सच नहीं बोलना चाहिए?

मेरा मतलब सिर्फ इतना कहना है की जिस सच्चाई से किसी का भला ना हो सके और उसे बोलने की जरूरत भी नहीं है वो नहीं बोलना चाहिए।