Monday, June 13, 2022

Friday, November 26, 2021

काम में आनंद की अनुभूति।

क्या काम करना ठीक है और क्या करना ठीक नहीं है ? 


यह के जटिल मुद्दा है क्योंकि एक ही काम किसी स्थिति में ठीक होता है तो किसी में खराब । तो इसका निर्णय कैसे करें।

इसका कोई एक सटिक स्केल तो नहीं है, लेकिन हाँ अगर एक चीज को हम स्केल मान लें तो काफी हद तक हम इस उलझन से बाहर आ सकते हैं। 


और वो स्केल है "आनंद की अनुभूति" अर्थात की अगर हम यह सुनिश्चित कर लें कि किस कार्य को करने से हमें पूरी तरह से  आनंद प्राप्त होता है और एक चीज और जोड़ लें कि जो कार्य हम कर रहे हैं उससे किसी व्यक्ति या वस्तु का डायरेक्ट या डायरेक्ट किसी भी तरह से कोई नुक्सान नहीं है तो वह कार्य सबसे अच्छा कार्य है, फिर उस काम को करने में हमें कितना भी समय लगे यह कोई चर्चा का विषय नहीं रह जाता। 

लेकिन समस्या कुछ और है, और वो ये है कि जिस काम को करने में हमें आनंद की अनुभूति होती है उसी काम से कुछ दिन बाद चिड़चिड़ाहट होने लगती है, और हम दूर भागते हैं। 

तो मतलब ये कि, कौन सा काम ठीक है और कौन सा नहीं ये कोई मुद्दा नहीं है बल्कि मुद्दा ये है कि जिस काम को हम कर रहे हैं उसमें निरन्तर उत्साह कैसे बनाये रखें।

Tuesday, January 19, 2021

लाइफ में सफल होने के लिए क्या चाहिए?

 सफल से मेरा मतलब है कि जो भी आप अपने जीवन में बनाना चाहते हैं, जो भी कुछ आप करना चाहते हैं। उसे पाने के लिए, उसे हासिल करने के लिए, उसे मूर्त रूप देने के लिए, आपके पास क्या होना चाहिए जो कि बहोत ही महत्वपूर्ण है।

 

हो सकता है पैसा,

हो सकता है सही लोग,

हो सकता है सही वातावरण,

हो सकता है अच्छा एडुकेशन,

हो सकता है अच्छा परिवार, (अच्छा परिवार मतलब की जो आपको हर तरह से सपोर्ट करता हो।)

अच्छा शरीर,

अच्छे लोग,

अच्छी संगत,

अच्छी टीम।


ऐसे तमाम चीजें हैं जिन्हें देख कर लगता है कि ये अगर न हो तो हम कभी सफल नहीं हो सकते। 

लेकिन एक चीज जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिसके कारण ही लोग हमें जानते हैं, लोगों के अंदर हमारी इमेज है और वो है हमारा चरित्र, हमारा कैरेक्टर। 


वो कहते हैं ना कि अगर धन चला जाये तो वापस आ सकता है, हेल्थ चला जाये तो वापस आ सकता है लेकिन अगर चरित्र (कैरेक्टर) चला जाये तो वह वापस नहीं आ सकता। 

एक बात समझनी बहोत जरूरी है कि कैरेक्टर होता क्या है, क्या होता है चरित्र? 

"लोग जिस इमेज के साथ हमें देखते हैं, हमें जानते हैं वही हमारा करेक्टर है।" 

जैसे-) जैसे:- आप कुछ लोगों को जानते होंगे जो हर वक्त गुस्से में होते हैं।

आप कुछ लोग को जानते होंगे जो हमेशा झूठ बोलते हैं।

आप कुछ लोग को जानते होंगे जो एक बार कुछ बोल दिए तो उसे करके ही मानते हैं।

आप कुछ लोग को जानते होंगे जो किसी बात को ज्यादा ध्यान से नहीं सुनते न ही कोई चीज कि जिम्मेदारी लेते हैं

तो कुछ लोग होंगे जो अपने काम को पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी से करते हैं। 

"ये सभी चीजें इंसान के चरित्र को, उसके करेक्टर को दर्शाती है।" 

ऐसे तमाम उदाहरण हैं जिससे लोगो के चरित्र के बारे में आप जानते हैं, समझते हैं। 

इंसान को कभी भी थोड़े से या बड़े से ही फायदे के लिए अपने करेक्टर को नहीं गिराना चाहिए। 

आप बात करें अब्दुल कलाम जी की, रतन टाटा जी की या एलोन मास्क की। ये वो महान लोग हैं जिन्होंने कभी भी अपने आप से कोम्प्रोमाईज़ नहीं किया चाहे जितनी भी बड़ी से बड़ी मुश्किल क्यों न आयी हो, इन लोगों ने किसी लालच में अपने ईमानदारी के कैरेक्टर को कभी नहीं छोड़ा।

आप जो भी हैं, जैसे भी हैं, बहोत बेहतरीन हैं। अगर खुद में कुछ बदलने की जरूरत लगे तो उसे बिल्कुल बदलें लेकिन अपने कैरेक्टर में रहते हुए, बिना अपने चरित्र को छोड़े। 


अगर जितने का कैरेक्टर अपने बना लिया जो बिल्कुल जीतेंगे, और अगर हारने के कैरेक्टर बन गया तो वही होगा जो आपकी मर्जी होगी।

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Wednesday, November 18, 2020

How to talk with a person in business ?


        


Business में हमें हमेशा नये लोगों से मिलना होता है, कुछ Deals पूरे होते हैं कुछ नहीं होते। कभी कभी तो ऐसा होता है कि कोई भी Deal पूरा नहीं होता,  लोग हमारे साथ नहीं जुड़ते लेकिन उसी काम के लिए किसी और से जुड़ जाते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है ये सोचने वाली बात है। 


होता ये है कि जब Deal पूरी नहीं होती तो उसके पीछे हमारे बात चीत करने के तरीका कैसा था,  उस पर निर्भर करता है। 

Business Talk का एक अलग तरीका होता है, कुछ Steps Follow करने होते हैं अगर हम इस Steps को Follow करें तो Deal पूरी होने की संभावना और भी ज्यादा बढ़ सकती है। 

◆ जब किसी से बात करें तो सामने वाले को महसूस होना चाहिए कि आप उस Field के बेहतरीन इंसान हैं जिसके बारे में आप बात कर रहे हैं।

◆ सामने वाले को बिल्कुल  Comfortable महसूस होना चाहिए,

◆ सामने वाले के किसी Problem को Solve करने की दिशा में बात करें, उसे लगना चाहिए आपके साथ जुड़ने पर उसकी कोई बड़ी समस्या सुलझाने वाली है।

◆ सामने वाले के किसी Emotional Point को जरूर छुएँ वो भी इस प्रकार से की उसे बुरा न लगे।

◆ सामने वाले को एक Question दे कर बात किlose कर दें। 

ये 5 Step Formula अगर हम Apply करें तो अपने Business में, एक नई ऊंचाई को छू सकते हैं।



आप सभी Group Family Member Please इसे आज किसी एक Person पर Apply करें और अपना अनुभव यहां हमारे साथ Share करें। 

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Saturday, November 7, 2020

बुध्दि और विवेक में अंतर।

बुद्धि- यह एक मानसिक प्रबलता को दर्शाती है, मतलब की जब हम परिस्थिति के अनुसान कुछ कार्य करते हैं परंतु इस बात पर गौर नहीं करते कि इसका रिजल्ट क्या होगा, बस कार्य को कर देते हैं, तब हम केवल बुद्धि का इस्तेमाल किये हुए होते हैं। 

बुध्दि से काम लेना मतलब कि उत्साहित होकर एक्शन करना, जैसे की जब कोई व्यक्ति कुछ काम को करता है, और रिजल्ट नेगेटिव आता है तो लोग कहते हैं कि 

"देखो ज्यादा बुद्धि लगा दिया" या बोलते हैं,

'बहोत बुध्दिमान बन रहा था अब समझ आएगा'

लेकिन जब व्यक्ति अपने विवके का इस्तेमाल करके कोई कार्य करता है तो इस बात की मउम्मीद ज्यादा होती है कि वह कार्य सही तरीके से होगा औऱ ऐसा कार्य करने वाले को लोग कहते हैं 

'वाह! ये व्यक्ति अपने विवेक का इस्तेमाल करके आज उचाईयों पर है'।

जब कोई काम बिगड़ जाता है तो बड़े लोग कहते हैं कि

'काश बुद्धि के साथ साथ विवके का भी इस्तेमाल करते तो ऐसा नहीं होता।'



यह इस प्रकार से है कि मान लीजिए कि आप एक कार चला रहे हैं, अब उसका जो एक्ससेलेटर है वो बुध्दि है और स्टेरिंग विवके है, मतलब की बुद्धि किसी कार्य में गति प्रदान करती है और विवके दिशा निर्धारित करती है और दोनों का ही अपना महत्वपूर्ण योगदान है।

दूसरे शब्दों में यह कह सकते हैं कि विवेक हमारे एक्सपेरिंस से आता है और बुध्दि हमारे इनफार्मेशन से, जो आज तक हम इकट्ठा किये हुए हैं। हमारे जीवन में दोनों ही चीजें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 


अतः बुध्दि और विवके इतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्ससाइड।

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Saturday, August 1, 2020

हर वक्त दिमाक चलता रहता है?


आज तक मुझसे बहोत से लोग मिले और एक बोलते हैं कि  "मेरा दिमाक सही जगह पर नहीं टिकता", हर वक्त माइंड में कुछ न कुछ चलते रहता है, कुछ अच्छा तो कुछ बुरा लेकिन कहीं रुकता नहीं है, मैं शांत नहीं रह पाता।

मैं जानना चाहता हूं कि आपका दिल अभी इस वक्त धड़क रहा है कि नहीं? आप बोलोगे धड़क रहा है।

अगर मैं पूछूँ कि क्या आपकी दिल की धड़कन ठीक चल रही है?
अगर मैं पूछूँ कि आपका ब्लडप्रेशर ठीक है कि नहीं?
अगर मैं पूछूँ कि आपका सही तरीके से खून का दौरा हो रहा है कि नहीं?
आपका पाचन सही चल रहा है की नहीं?
तो आपका उत्तर होगा कि हाँ सब कुछ ठीक चल रहा है।

अगर मैं ये पूछूँ की अगर इनमें से कुछ चीजें चलना बंद हो जाये तो आप क्या करेंगें? तो उत्तर आएगा कि फिर मैं डॉक्टर को दिखाऊंगा। क्योंकि इस परिस्थिति में मैं सामान्य नहीं रहूंगा, मुझे बीमार हो जाऊंगा।



तो मैं ये जानना चाहता हूँ कि फिर आपको केवल अपने दिमाक से दुश्मनी क्यों है? क्योंकि जैसे दिल का, पाचन क्रिया का, ब्लड का अपना काम होता है, वैसे ही दिमाक का भी काम होता है, चलते रहना। लेकिन यहां बदलाव ये है कि दिमाक में क्या चल रहा है और कैसे चल रहा है इसका चुनाव हम कर सकते हैं, इसे हम हर एक सेकंड मॉनीटर कर सकते हैं। तो समस्या ये नहीं है कि दिमाक चल रहा है, समस्या ये है कि क्या चल रहा है।

तो हमें दिमाक के चलने को नहीं बदलना है, क्या चल रहा है उसे अपने हिसाब से बदल लें तो फिर कोई समस्या नहीं है, तो बात आती है की कैसे इस चीज को कंट्रोल करें कि दिमाक में क्या आये और क्या नहीं।

सच्चाई ये है कि जिस तरह से हमारे शरीर के बाकी अंग समय समय पर अपनी स्थिति को बदलते रहते हैं।
जैसे कभी बीपी कम तो कभी ज्यादा हो जाती है,
कभी पाचन ठीक तो कभी खराब हो जाता है,
वैसे ही दिमाक का भी बदलाव चलता रहता है।

हमें सिर्फ ये देखना है की 24 घंटे के समय में अधिक समय तक हम क्या सोचते रहते हैं, हमारा दिमाक किस दिशा में है और कितना है। और इसे समझने के लिए महत्वपूर्ण चीज ये है कि हम कितना जागरूक हैं अपनी सोच को लेकर।
अगर हमारे पास कोई महान लक्ष्य है जो मानव जाति के साथ साथ इस संसार के लिए भी ठीक है और हम उसके प्रति जागरूक हैं, तो निश्चित रूप से हमें कोई विचार बहोत परेसान और उदास नहीं कर सकती और हम आनंद के साथ अपना जीवन बिता सकते हैं बिना हैरान और परेशान हुए।

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Thursday, June 11, 2020

आइये थोड़ा खुश होते हैं!

काल करे सो आज करें, आज करें सो अब।
पल में प्रलय होयगी बहुरि करोगे कब?



(हो सकता है इस दोहे में मुझसे इस्पेल्लिंग गलती हुआ हो, तो माफ कीजियेगा लेकिन आज इसके सूत्र को समझने का समय आ गया है)

कबीर दास का ये दोहा बचपन में पढ़ाया गया था, तब कुछ खास समझ नहीं आया, लेकिन ये भाविष्य के लिए पढ़ाया गया था अब महसूस होता है। न जाने कितने काम हम पेंडिंग में छोड़े पड़े हैं ये सोच कर की
एक दिन मैं ये करूँगा, एक दिन मैं वो करूँगा
लेकिन सच्ची तो ये है कि उस एक दिन का मतलब है कोई भी दिन नहीं।

सोचिये हम कितने लोगों का दिल दुखाये होंगे, कितने लोगों को तकलीफ दिए होंगे, मन भी करता है जाकर माफ़ी मांग लें, लेकिन सोचते हैं। "एक दिन बोलेंगे"।

जी करता है कि कुछ अच्छा करें, कुछ लेकर आएं परिवार के लिए, बच्चों के लिए, मां के लिए, भाई के लिए लेकिन फिर सोचते हैं "एक दिन ऐसा करेंगे" और शायद एक दिन-एक दिन करते-करते सालों बीत गए लेकिन वो दिन अभी तक नहीं आया।

उस दोस्त को देख कर अभी भी मुह मोड़ लेते हैं जिसके बिना हम कुछ खाते तक नहीं थे, जी करता है बात करें, और ये भी पता है कि सामने वाला भी यही सोचता है लेकिन "एक दिन ऐसा कर लेंगें" सोच कर सालों से एक सुंदर रिश्ते को छोड़े पड़े हैं।

आज खुद से एक वादा कीजिये, आइये कम से कम एक रिस्ते को जिंदा करते हैं, अगर हमारी गलती नहीं है फिर भी अगर सॉरी बोल देने से सब कुछ ठीक हो सकता है तो सॉरी बोलते हैं ना, कुछ नहीं बिगड़ेगा बल्कि अच्छा होगा।
घर के जो बड़े हैं शायद उनका पैर छुए सालों बीत गए तो आइए आज ऐसा करते हैं।

आइये आज अपने अध्यापक को, भाई-बहन को दोस्त को, जीवन साथी को
आई लव यू बोलते हैं ना,

मुझे पता है आपकी आंखें थोड़ी नम है, फिर ये भी सोच रहे हैं कैसे करूँ, फिर लगेगा कि ये सब फालतू की बात है,  सोचिये अब तक कितना हम सब फालतू का काम कर चुके है, तो आज एक और सही, मैं कम से कम पांच लोगों को आई एम सॉरी और आई लव यू बोलूँगा आंसू आएंगे तो रो लूंगा लेकिन फिर बहोत अच्छा लगेगा। अगर आपको ठीक लगे, तो बताइयेगा जरूर अपने कितने लोगों के साथ ऐसा किया, आइये आज मन और दिमाक दोनों को थोड़ा सा सांत करते हैं।

आइये आज दिल खोल कर जीते हैं, फिर से खुशियों को जोड़ने की कोशिस करते हैं, आइये थोड़ा प्यार बाटते हैं।

Saturday, May 30, 2020

Conscious Vs Un-Concious mind

हमारा Mind 3 Level पर काम करता है,
1- Conscious Mind
2- Un-Concious Mind
3- Sub-Concious Mind



हमलोग आज बात करेंगे Concious और Un-Concious Mind के बारे में और हमें अपने Goal को Achieve करने में यह कैसे Help करता है इसके बारे में भी।

अगर सीधे-सीधे समझा जाये तो जिस काम को करते हुए हम सबकुछ महसूस करते हैं, मतलब की पूरी तरह से जाग कर उस काम को करते हैं उस Time पर हम Concious होते हैं।
अब Un-Concious का मतलब ये नहीं कि हम सोये हैं, बस हमारा ध्यान काम में नहीं है, अब बात ये आती है कि क्या Un-Concious होना हमारे लिए
हमेशा बुरा होता है? तो इसका Answer है नहीं ऐसा नहीं है। Un-Concious होना भी हमारे लिए उतना ही जरूरी है जितना कि Conscious होना।

For Example:- अगर आप Student हैं और पढ़ाई कर रहे हैं, और आपके घर के बाहर बच्चे खेल रहे हैं, आवाज कर रहे हैं। इस स्थिति में यहाँ आपको अपने पढ़ाई के लिए जितना Conscious होने की जरूरत है उतना ही बाहर के आवाज के लिए Un-Concious होना भी जरूरी है। नहीं तो आप कुछ कर ही नहीं पायेंगे, हमेशा Disturb ही रहेंगे।

अब इसे अगर अपने Goal से जोड़कर देखें तो हमें अपने Goal के लिये Concious होना होगा,
Actually आपको Un-Concious होने के लिए कुछ भी नहीं करना होता बस आप जो चाहते हैं उसके लिए Conscious होना पड़ता है। Unwanted चीजों के लिए आप Automatically Un-Concious हो जाएंगे।

आपका Goal हर समय आपके Mind में होना चाहिए,
बहोत से Trainer अपनी Training में बताते हैं कि हमें अपने Goal को दीवाल पर या किसी Board पर, चिपका देना चाहिए, Wallpaper में अपने Goal को लगा कर रखिये, Actually वो इस बात की Training देते हैं कि कैसे अपने Goal को Mind में Set करें, कैसे Fully Concious होकर अपने Goal पर Focus करें।

Conciousness को बढ़ाने का सबसे Best तरीका है Aquar the Right knowledge. आप अपने काम से जुड़ी हर तरह की Knowledge इकठ्ठा करना शुरू कीजिए बस इतना ही करना है। आपको फिर जितनी Consciousness की जरूरत है वो आने आप Develop हो जाएगी।

Saturday, April 25, 2020

What is Motivation?

The correct knowledge about a work and internal voice to do that work is real motivational source.

कभी-कभी हम कुछ करने की सोचते हैं, और कोशिस भी करते हैं, लेकिन कुछ समय के बाद उसे करने का मन नहीं करता, फिर अगर कहीं से Motivation मिल गया तो थोड़ा समय तक फिर उस काम को करते हैं लेकिन फिर कुछ समय बाद मन नहीं करता।  बाद में ऐसा महसूस होता है कि "इस काम को करने के लिए कहीं से कोई Motivation नहीं मिला"।
                                       

Motivtion is not a booster tools it's also a part of knowledge.

Motivation भी एक तरह का Knowledge ही है और जब यह हमें अपने काम से Realated मिलता है तो हम खुद को Connect करते हैं और Result कुछ और ही आता है।

 सोचिये की अगर Motivation एक Power Booster होता तो यह एक ही तरह की से सभी के लिए काम करता लेकिन ऐसा नहीं है।
एक Army man को अलग,
एक Doctor को अलग,
एक Student को अलग और
एक Businessman को अलग अलग बातें Inspire करती है।
जिसे जिस चीज की जानकारी है उसी तरह की Motivation भी काम आती है।

तो ये सच है कि कुछ भी करने के लिए सही Knowledge और अंदर की आवाज ही सब कुछ है फिर उसके बाद परिस्थिति कुछ भी काम हो ही जाता है।

Friday, April 24, 2020

गरीब Vs अमीर Mind Set

इस बात से बिल्कुल भी इंकार नहीं किया जा सकता कि हम जो कुछ भी हैं जैसे भी हैं अपनी मानसिकता के कारण ही हैं।हमारे दिमाक में जो चीज जितनी प्रबलता से पनपती है वही हमारे जीवन में होती रहती है। स्वामी विवेकनंद जी कहते हैं कि
"हम जैसा सोचते हैं एक दिन वैसे ही बन जाते हैं।"

आज हम बात कर रहे हैं गरीब और अमीर मानसिकता के बारे में।

हम सब जानते हैं कि लोग या तो गरीब होते हैं या अमीर। लेकिन मानसिकता भी गरीब और अमीर होती है ये थोड़ी सी नई और गौर करने वाली बात है। अगर हम  स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से समझने की कोशिस करें तो ऐसा समझ आता है कि-

गरीब मानसिकता का मतलब की अगर हम छोटी छोटी बातों पर हर वक्त फायदे और नुकसान के बारे में सोचते हैं, हर वक्त चीजों को Calculate करके देखें, और थोड़ा सा घाटा होने पर Over React करते हैं तो ये गरीब सोच वाली मानसिकता है। और अगर हम ऐसा सोचते हैं तो एक न एक दिन गरीबी हमें जरूर घेरेगी। मतलब कि हमारा भविष्य अंधकार में है। लेकिन दूसरी ओर

अमीर मानसिकता का मतलब बिल्कुल इसका उल्टा, हम खुले मिजाज के बनें, हर छोटी छोटी से बातों पर घाटे और फायदे के बारे में न सोचकर दूर दृष्टि रखें तो ये अमीर सोच की मानसिकता कहलाएगी।

आज आप क्या हैं उससे कोई फर्क नहीं पड़ता आप कैसे सोचते हैं और क्या बनना चाहते हैं इससे बहोत फर्क पड़ता है। एक छोटी से Situation से समझने की कोशिस करते हैं।

अगर एक गरीब व्यक्ति अपने परिवार के लिए कुछ 27 रुपये का सामान लिया और 50 कि नोट देखकर ये Calculate नहीं करता कि कितना बचा तो वह अमीर मानसिकता का है और अगर कोई अमीर व्यक्ति 1923 रूपये का सामान लेकर 2000 का नोट देकर तुरंत लगता है Calculate करने तो वह गरीब मानसिकता का है, ये मानसिकता ही हमें मंजिल तक ले जाती है।
यहां बात गणित में तेज या कमजोर होने की नहीं है बल्कि Calculate करने की आदत का है।
ये छोटी छोटी बातें हमें बताती हैं कि हम किस ओर जा रहे हैं,
कुछ लोगों को इस बात का बहोत Tension होता है
"मेरी गाड़ी 7 साल पुरानी हो गई है और इतना जल्दी बहोत कम Average देने लगी।"

चेक कीजिये साहब 7 साल "इतनी जल्दी" वाले Catagory में नहीं आती।

यहां बात केवल गरीब और अमीर की नहीं हो रही है ये तो एक आधार है समझाने के लिए है कुछ ऐसे ही हम सब जीवन के सभी क्षेत्र में करते हैं।
कुछ भी करने के लिए 80% तो केवल मानसिकता को बनाने में और बनाये रखने में ऊर्जा खत्म होती है बाकी तो 20% केवल काम करना होता है।

हो सकता है ये बात थोड़ी अजीब लगे लेकिन कुछ महान करने के लिए अजीब आदतों का होना भी बहोत जरूरी है साहब।

Monday, February 24, 2020

Self Love 💐


 हमें सब कुछ Celebrate करना चाहिए लेकिन हम नहीं करते, हर वो चीज जो हमारे लिए अच्छा है, या जब भी कोई Person हमारे Life में आये तो उस Moment को Celebrate करना चाहिए, लेकिन हम नहीं करते हैं। उसका एक कारण है। और वो है! खुद से प्यार न करना ।



                               

जरा सोचिए कि आप कब अपने आप के साथ अकेले में बैठे थे?
वो कौन सा दिन था जब खुद को पहचाने थे?
तो शायद ऐसा कोई दिन ही नहीं है। ये Question ही सुनकर बड़ा अजीब सा लगता है कि खुद से कब मिले थे?
कुछ लोग हैं जो खुद से प्यार करते हैं लेकिन वो खुद में ही Confused भी हैं। उन्हें लगता है कि अगर वह खुद से प्यार करते हैं तो इसका मतलब है कि  वह अपने मन से कुछ भी करें सब ठीक है। उन्हें कोई Guide नहीं कर सकता। वो लोग उल्टे सीधे काम करने लगते हैं, ये एक बहुत बड़ी Confusion वाली बात है कि अगर आप खुद से प्यार करते हैं तो अपने आप के लिए कुछ भी कर सकते हैं।
कुछ लोग तरह-तरह के नशा करते हैं,
कुछ लोग गंदे तरीके से व्यवहार करते हैं,
कुछ लोग Society से बिल्कुल अलग तरीके से रहने लगते हैं,
और उन्हें लगता है कि वो अपना रास्ता खुद चुनेंगे और अपने मन से कुछ भी कर सकते हैं क्योंकि वो खुद से प्यार करते हैं।

"लेकिन साहब ऐसा करना ठीक नहीं है।"

खुद से Love करने का मतलब होता है कि "हर वो काम करना जो अपने लिए और औरों के लिए फायदेमंद और जरूरी हो।"

ऐसे बहोत से पहलू हैं जहाँ हमें खुद से, अपने आप से प्यार करना चाहिए, जैसे कि बात हो
Health की,
Personality Development की,
Self Respect की,
Self Guidence की,
दोस्तों के चुनाव करने की,
अपने जीवन साथी के चुवान करने की,
अपने Career की चुवान करने की,
अपने गुरु Mentors के चुनाव करने की,
अपने मनपसंद Education लेने की,
अपने Hobby को जीने की।

अगर हम ये सब चीजें किसी और के Guidance में आकर करते हैं तो फिर ये साफ है कि हम खुद के साथ नहीं हैं। बल्कि किसी के इशारों पर चल रहे हैं। लेकिन जब हम इन चीजों को अपने According करते हैं तो इसका मतलब होता है कि We are in Self Love.
और जब तक हम अपने आप को पहचान न लें,
जब तक हम अपने आप को नजदीक से जान न लें
तब तक हम न खुद के लिए कुछ बेहतर कर सकते हैं ना ही किसी और के लिए।

एक Question कीजिये खुद से अभी और इसी वक्त, कि अगर आप खुद से प्यार नहीं करते, खुद को Respect नहीं देते तो फिर किसी और से इसकी उम्मीद क्यों करते हैं?

Self Respect is First Key to be Success in Life.

Sunday, January 19, 2020

How To Do A Work?


हम हमेशा से सुनते आ रहे हैं की हमें मेहनत से काम करना चाहिए। Actually अगर थोड़ा सा Deeply सोचें तो ये बात समझ ही नही आती की मेहनत से काम करना क्या होता है, ये केवल कहने और बोलने वाली बात है, अगर किसी को पढ़ाई करनी है तो उसमें मेहनत कैसे करें?? पढ़ने में तो Concentration की जरूरत है मेहनत की कैसे जरूरत पड़ती! It's very confusion-able.

कभी कभी जब किसी Company में Sales की Training दी जाती है तो Salesman Fully Chargeup  हो जाते हैं और बोलते हैं "अब तो मैं Market में आग लगा दूंगा।"
लेकिन उन्हें खुद Clear नहीं होता कि "आग" लगाना किसे कहते हैं।
Acually अगर जरा ध्यान से समझने की कोसिस करें तो ये समझ आता है कि काम करके या मेहनत करके कुछ भी हम हासिल नहीं कर सकते क्योंकि ये शब्द "मेहनत" और "आग लगा देना" बहोत बार Confusion Creat करते हैं। किसी काम को अंजाम देने का सीधा सा और सटीक Formula है की-
                         

1- सबसे पहले लक्ष्य Decide करें।
2- फिर Clear करें की उसे करने के लिये किन किन चीजों की जरूरत पड़ रही है।
3- अब जिन चीजों की जरूरत है उनमे से हमारे पास क्या-क्या है, और क्या-क्या नहीं है।
4- अब जो चीजें नहीं है वही Problem है।
5- अब ये सोचने वाली बात है कि इस Problem को कैसे Solve करें
6- Problem Solve करने को ही Work करना बोलते हैं।

आइये एक Example से इसे समझने की कोसिस करते हैं।

Example:- मान लीजिए कि एक Salesman है जिसे खूब charge up कर दिया गया, अब
उसके अंदर बहोत सारा Motivation भरा पड़ा है उसे लगता है की Market बहोत Clear है आज तो Market में आग लगा दूंगा, आज तो केवल मैं ही मैं हूँ...

अब सोचते हैं कि क्या क्या Problem आ सकती है Salesman को Sales करने में

●हो सकता है उसके पास अच्छे कपड़े ना हों,
●हो सकता है उसके पास Vehicle ना हो,
● हो सकता है उसे Product के बारे में पूरी जानकारी ना हो,
●हो सकता है वो ऐसे Market में चला गया हो जहाँ उस Product की Need ही ना हो,
●हो सकता है उसकी Communication Skill अच्छी ना हो,

ऐसी बहोत सी Problem हो सकती है जो उसे पता ही न चलती हो और Fully Chargeup हो कर काम कर रहा हो।

मान लीजिए की उसे Product की Knowledge ही ना हो लेकिन वो अपनी Communication Skill को सुधारने में लगा है तो क्या वो Sales कर आएगा? नहीं।

अगर उसे Product की पूरी जानकारी हो, Communication Skill भी अच्छी है लेकिन जिस Market में वो काम कर रहा है वो Market ही सही ना हो, तो भी Sales नहीं होगा।

कुछ ऐसा ही हमारे Life में भी हो रहा है, हम जो भी सोचते हैं बस लग जाते हैं उसके सभी पहलू को समझने की कोसिस ही नहीं करते।

हम बात करें Dreams की,
हम बात करें Health की,
हम बात करें Life-Style की,
हम बात करें Relationship की।
हर तरफ हम केवल सब कुछ Manage करने की कोसिस में हैं। अगर हम Manage करने के जगह इस बात पर ध्यान दें की Actually Problem क्या है और उसका Solution क्या है तो सब कुछ बहोत आसान हो सकता है।

This is the Formula of Achieve the Goal very Simply, Clearly & Shortly.

Tuesday, December 31, 2019

Accept your present conditions.



आज जो कुछ भी आप हैं वो आप ही हैं, और कल जो कुछ भी आप होंगे वो खुद ही होंगे। ये एक ऐसी सच्चाई है जिससे मुह नहीं मोड़ा जा सकता, आज आपकी Physical, Financial, Mental, Spiritual स्थिति जैसी भी है आपके अपने कर्मों के वजह से है। अगर आपको लोग प्यार करते हैं तो आपके कर्मों के वजह से, अगर आपसे नफ़रत करते हैं तो आपके कर्मों के वहज से, लेकिन हम सब उन चीजों को बदलने में परेशान हैं जो हमारे हाथ में नहीं है, और जो कुछ भी हमारे हाथ में है उसे बदलने के बारे में कुछ भी नहीं सोच रहे हैं।

दोस्त कुछ चीजें हमारे पास ऐसी होती हैं जो हम बदल नहीं सकते जैसे कि, हमारे शरीर का रंग, हमारे आँखों का रंग, हमारी आवाज। ऐसी तमाम चीजें हैं जिसे बदल पाना हमारे हाथ में नहीं है। ये सबकुछ Nature का दिया हुआ है। आज जो भी Natural चीजें हैं वो अपने आप में, वातावरण के अनुसार बहोत ही संतुलित हैं और सभी के लिए अच्छी हैं, अगर आपका रंग काला है,बहोत गोरा है, आप बहोत लंबे हैं, छोटे हैं जो भी हैं आप Nature का सबसे Best Creation हैं।
अगर आपका Age ज्यादा हो गया है तो चेहरे पर झुर्रिरियाँ हैं तो ये Natural है इसे सच्चे दिल से पूरी तरह से Conscious हो कर
Accept करें। हर वो चीज जो Natural है उसे सच्चे दिल से ऊपर वाले को शुक्रिया करके, धन्यवाद देकर Accept करना चाहिए।

■ कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो कि हम अपने Life में खुद जोड़ते हैं, अनुमति देते हैं ऐसी चीजों को हमारे Life में, हमारे जीवन में आये। जैसे Health, Friends, Financial Condition, Life-Partner etc. दोस्त आज़तक जो कुछ भी हुआ, जो कुछ भी अपने किया, जाने में या अंजाने में उसके वजह से आज आपकी ये Conditions बानी हुई है। वो अच्छी है या बुरी है लेकिन उसके लिए Responsible आप ही हैं और आप Natural हैं। इसका मतलब की जो कुछ भी हुआ आज तक उसमें Nature का बहोत बाद हाथ था, हाँ ये बात 100% सही है कि Direction अपने दिया था तो दोस्त आज की अपनी स्थिति को सच्चे दिल से Accept करें। बेइंतहां प्यार करें खुद से Accept करें अपनी उपलब्धियों को और अपनी कमियों को भी।

 और फिर जोर लगाकर, पूरी ताकत से, ऊपर वाले को धन्यवाद देकर-
@ बदल दो हर वो चीज जो खुद को पसंद न हो।
@ तोड़ दो हर वो बंधन जो जकड़े हुए है।
@ फाड़ दो हर वो पर्दा जो तुम्हें रोके हुए है।


दोस्त आज हम सब कहीं ना कहीं कुछ न कुछ कर रहे हैं, कोई Study कर रहा है कोई Job कर रहा है, कोई Business कर रहा है। और वहाँ हमारी कोई न कोई Position है। और Maximum लोग अपनी Position से खुश नहीं हैं। जरा सोचिए कि हम क्या कर रहे हैं! अपने आपके साथ, अपने काम के साथ, जाने अंजाने में हम खुद को, अपने काम को, अपनी Position को गाली दे रहे हैं खुद की बेइज्जती खुद ही कर रहे हैं। जरा गौर से देखिए, जिस भी मुकाम पर आप हैं, जिस भी स्थिति में आप हैं वो कई लोंगों का सपना है मेरे दोस्त। जिस Position में आप हैं उसके लिए लोग क्या क्या कर रहे हैं। और हम और आप उसकी बेईज्जती कर रहे हैं।

प्यार कीजिये अपने आपसे, अपनी Quality से और जो पसंद है उसे पूरे दिल और जान से करने में जुट जाइये।

Wednesday, November 27, 2019

Are you in tension?



आज और अभी, अभी मतलब की जिस घंटे, मिनट और सेकण्ड में आप इस ब्लॉग को पढ़ रहे हैं उस Time पर आपके मन में क्या चल रहा है?
थोड़ा देर रुकिये,पढ़िए नहीं.................सोचिये।

क्या चल रहा है आपके मन में, शायद कुछ भी नहीं, ना कुछ अच्छा, ना कुछ बुरा, ना ही कोई Image. सब कुछ शांत है अब जरा ध्यान से सोचिये क्या आप किसी बात से दुःखी हैं जो कि अभी हो रहा हो? क्या आप अभी और इस Time के किसी घटना से दुःखी हैं?- नहीं बिल्कुल नहीं, आप अभी बिल्कुल शांत हैं। इसका मतलब ये है कि अगर आप किसी बात से दुःखी हैं, परेशान हैं, तो उसका कारण केवल और केवल हमारा बिता हुआ कल है और आप अभी इस वक्त पूरी तरह से सचेत हैं, Concious हैं, और Silent हैं।

दोस्त, हमारा बीता हुआ कल हमारे आज के और हमारे आने वाले कल दोनों के समय को खत्म कर रहा है। ना आज जीने दे रहा है ना ही कल को अच्छा बनाने में हमें मदद कर रहा है, बल्कि हमारे सोचने और समझने की शक्ति को कमजोर करते जा रहा है।
बीते हुए कल को आप बदल नहीं सकते और आने वाले कल की कोई Guarantee नहीं है, बस आप आने वाले कल की एक Image बना सकते हैं, एक Direction देने की कोशिश कर सकते हैं, आज जो आप कर रहे हैं वही कल को निर्धारित करेगा।

Upset हैं, दुःखी हैं, परेशान हैं, ये बातें बीते हुए कल के वजह से है या हम जो Future के बारे में सोच कर जी रहे हैं उसकी वजह से है, लेकिन सबसे Important है कि हम जो आज कर रहे हैं, सोच रहे हैं, महसूस कर रहे हैं उससे हमारा कितना Development हो रहा है।

अगर हम Develop कर रहे हैं ना तो Future अपने आप Bright हो जाएगी, बस इतना ही हो सकता है कि जैसा आप सोचें हैं वैसा हूबहू ना हो।

Thursday, November 21, 2019

आप अपने सोच के मालिक हैं या गुलाम?


अपने सोच का गुलाम बनाना :- मतलब की जब हम वो सब करते हैं जो हमारे दिमाक में आता है तब हम अपने सोच के गुलाम होते हैं, क्योंकि तब हम उस काम के Right Or Wrong होने के बारे में नहीं सोचते, उस काम से Society को होने वाले फायदे या नुकसान में बारे में नहीं सोचते, बस कर देते हैं। जैसे कि अगर हम Highway पर अपनी गाड़ी से हैं तो यू ही मन करता है कि गाड़ी तेज चलायें, और हम 100-150 की Speed में गाड़ी भगाने लगते हैं, ऐसे ही Maximum Students होते हैं, जब मन किया पढ़ लिया नहीं मन किया नहीं पढ़ा। आज कल नशा करना Maximum Youngsters के लिए आम बात हो गया है Mind में आया कि बस Start कर दिये। ऐसा केवल इस लिए है क्योंकि हम जाने अंजाने में अपने सोच के, अपने मन के गुलाम हो गये हैं। 

कुछ ऐसा ही हम रिश्तों में भी करते हैं अपने Life Partner के साथ करते हैं, जो दिल में आया बोल दिए, जैसे मन हुआ वैसा व्यवहार कर दिये, ऐसे ही हम अपने घर के बच्चों के साथ करते हैं। जिंदगी के हर पहलू पर Maximum Time हम वही करते हैं जो Mind में आ गया।

अपने सोच का मालिक बनना:- जब हम अपने सोच के मालिक होते हैं तब हम सुलझे हुए और समझदार होते हैं, कुछ भी करने से पहले हर एक चीज से होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में सोचते हैं।
हमें क्या पढ़ना चाहिए, क्या खाना चाहिए, किससे मिलना चाहिए, किससे नहीं मिलना चाहिए, कहाँ जाना चाहिए, कहाँ नहीं जाना चाहिये, क्या,कैसे और कितना काम करना चाहिए ये सब कुछ सोच समझ कर करते हैं।
●अब बात ये आती है कि अपने सोच के मालिक कैसे बनें?
 सबसे पहले खुद को समय देना शुरू करें, खुद से बात करने (Self Talk) की कोशिश करें, कुछ भी बोलने से पहले कुछ Second के लिए रुकें, सोचें, फिर बोलें। कुछ करने से पहले कुछ Minute के लिए सोचें, अगर ना समझ में आये तो जिसे आप अच्छा समझते हैं उससे राय लें,
किताबें पढ़ें या Videos के माध्यम से जानकारी लें।

विश्वास कीजिये कुछ दिनों के अंदर बदलाव होना शुरू हो जाएगा और आप एक बेहतरीन इंसान बन जाएंगे।

Love Or Attractions With Works.

If you have not interest- then you can't do the best.

हर वो चीज़ जिसमें आपका पूरा दिल और दिमाक लगता है, जिस काम को किये बिना आपका मन नहीं मानता, अगर वो न करें तो कुछ भुला-भुला सा लगता है, तो समझ लीजिए दोस्त की आपको अपने काम से बेहद प्यार है वो Study, Dance, Music, Sports Etc. कुछ भी हो सकता है।
लेकिन अगर आपको अपने काम में Interest नहीं है तो उसमें आप चाहे जितना भी कोशिश क्यों न कर लें कभी भी आप अपना Best नहीं दे सकते।

We driven by two things LOVE and ATTRACTION.

केवल यही दो चीजें ही हमें Drive कर रही हैं।
जिस चीज से हमें प्यार होता है उसमें हम पूरी तरह से डूबे रहते हैं जैसे :-
●Music से प्यार है तो आप उसमें Best कर सकते हैं, जैसे की A.R. Rehman ने किया।
●सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट से प्यार है, आज वो भारत रत्न हैं।
और आपको किस काम से प्यार है ? जरा सोचें।

अगर हमें अपने काम से केवल Attraction है तो उस काम में हम कभी भी अपना दिल और दिमाक नहीं लगा सकते।
हमें Real Love क्या चीज से है इसे ढूंढना कठिन हो जाता है या यूँ कहें कि हमें इसके बारे में कोई ख्याल नहीं है कि काम से सच्चा प्यार होना किसे कहते हैं।

सच्चाई तो ये है कि हमें अपने आप से ही प्यार नहीं है तो अपने काम से क्या प्यार होगा। हम खुद को हर समय कोसते रहते हैं, छोटा महसूस करते रहते हैं हर वो कमी जो हमारे अंदर है उसे हम हमेशा Focus करते हैं। आप छोटे हो,मोटे हो, काले हो, बहोत गोरे हो, बहोत लंबे हो जो कुछ भी हो अपने माँ से पूछना की जब आप इस दुनियाँ में आये थे तो उनके लिए- उस पल के लिए- उस Time पर सबसे खूबसूरत इंसान कौन था?
यार Believe yourself अगर आप खुद को Underestimate करते हैं तो आप Nature का विरोध कर रहे हो, आप उस Supreme Power को Value नहीं दे रहे हैं जो हम सबको चला रहा है, और अगर आप अपने काम को प्यार नहीं कर रहे हो तो ऊपर वाले के द्वारा दिये गए Opportunity का विरोध कर रहे हो।

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपको किस काम से प्यार है तो जिस दिन आपमें अपने काम को करते हुए किसी दूसरे काम को करने के लिए मना करने की हिम्मत आज जाए समझ लेना कि आपको अपने काम से सच्चा प्यार हो गया है, और यही चीज आपको TOP पर लेे जाएगी।


"If you are underestimate yourself it means you dislike the top creation of god. Start love yourself the world will love you much than you."

Saturday, October 26, 2019

अपने अंदर एक दीप जलाएँ।





आज के दीवाली में क्या कुछ नया करने वाले हैं आप लोग, शायद सब कुछ वही तो नहीं जो पिछले साल किया था।

क्यों ना आज एक दीप अपने अंदर भी जलायें, दोस्त हम सब जितना खुद को समझते हैं उतना कोई नहीं समझता, जितना खुद को जानते हैं उतना कोई नहीं जानता।

                  एक बात 100% सच है कि हम जाने या अंजाने में किसी ना किसी को कभी ना कभी दुःखी तो किये ही होंगे, तो आइए आज उनसे सच्चे दिल से माफी माँगे, अगर बात करके माफी माँग सकें तो बहोत अच्छा है लेकिन शायद ये करना कठीन होगा। आइये अपनी आंखें बंद करके जिसे कभी दुःखी किये हैं उसे याद करें और मन ही मन उनसे माफी मांगे।
Believe कीजिये मन बहोत हल्का हो जाएगा, आँसू भी गिरे तो गिरने दीजियेगा, हो सकता है दिन भर थोड़ा थोड़ा आंसू गिरे तो गिरने दीजियेगा, करके देखिए! अंदर एक दीप जरूर जलेगा।
 "और जिन लोंगो ने हमारी सहायता की है उन्हें भी मन ही मन धन्यवाद दीजिये।"

आइये मिलकर दीपावली मनाएं
अपने अंदर एक दीप जलाएँ।





Wednesday, October 23, 2019

क्या आपको नहीं लगता???

हम अपने life में कुछ ज्यादा ही Artificial Activity में Involve हो गए हैं।

क्या आपको नहीं लगता?
जब किसी बच्चे का जन्म दिन पड़ता है तो उसे इस बात का इन्तेजार होता है कि आज अधिक से अधिक लोग उसे Wish करें, हो सकता है कि बच्चा किसी बात से नाराज हो फिर भी वो इस इन्तेजार में होता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग उसे Whatsapp, Facebook जैसे Social Sites पर Wish करें, और ये केवल बच्चों की नहीं है बल्कि बड़े लोंगो की भी स्थिति यही है।
कुछ लोग तो इस बात से नाराज हो जाते हैं कि आज मेरे दोस्त ने, मेरे Relative नें मुझे Good Morning Wish नहीं किया, कुछ लोग इस बात से डरे रहते हैं कि अगर मैं आज अपने दोस्त को Wish नहीं किया तो वो नाराज हो जाएगा भले ही वो खुद किसी बात से बेहद उदास क्यों ना हों।

जब भी आपको किसी रिश्ते को निभाने के लिए अपने Mind का इस्तेमाल करना पड़े, सोच कर कोई Planing करना पड़े तो समझ लेना कि वो रिस्ता गहरा नहीं
क्योंकि रिश्ते दिल से जुड़ते हैं दिमाक से नहीं।




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Monday, October 21, 2019

Learn Right or Wrong?


एक बात हमेशा हमें परेशान करती है और वो है, सही और गलत का चुनाव करना। हमारे लिए सही चीज का चुनाव करना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि एक सही फैसला हमारें जीवन को सुधार सकती है और एक गलत फैसला हमारे जीवन को बर्बाद कर सकती है। और कभी-कभी हमारी यही सोच हमें आगे बढने से रोकती भी है।
जब हम कुछ सीखने जाते हैं या कुछ नया करने जाते हैं तो इस बात का बहुत ध्यान देते हैं कि कहीं हम कुछ गलत न सिख लें और इसी में फस कर हम कुछ भी नहीं सिखाते, जब ऐसी बहुत सी चीजें होती है जिसे की हम थोड़ा गलत भी सिख कर सही के काफी नजदीक पहुच सकते हैं।

आइये इसे एक उदाहरण से समझते हैं :- 
मान लीजिये की एक बच्चा है और उसे गणित सीखना है,अब किसी (Teacher) A ने इसे बताया कि 5+5=10 होता है,
(Teacher) B ने बताया कि 5+5=11 होता है,
और किसी ने बताया कि पहले और दूसरे में से कोई एक गलत बताता है।
अब दो Situation सोच कर इस बात को बारीकि से समझते हैं कि क्या होता है,
First Situation :-
मान लीजिये की जो बच्चा है उसे कोई पहले ही बता दिया कि एक Teacher गलत बताता है और वह बच्चा ये सोच कर पढ़ने ही नहीं जाता कि मैं गलत सिख लूँगा। और वो कुछ भी नहीं सीख पाता।
Second Situation:- 
मान लीजिए की वो बच्चा गलत सिख लिया कि 5+5=11 होता है, तो एक बात तो ठीक है कि उसने गलत सीखा लेकिन जब उसे सही पता चलेगा कि 5+5=10 होता है, तो उसे ये भी पता चलेगा कि क्या-क्या जोड़ने पर 11 होता है, उसे ये भी पता चलेगा कि 11,10 से बड़ा नंबर है, उसे ये भी पता चलेगा कि 5 कौन सा नंबर है। उसे जोड़ने का तरीका आ जायेगा, उसे बहुत कुछ सिखने को मिलेगा।

 कुछ ऐसा ही हमारे लाइफ में भी हो रहा है, हम कुछ भी नया  करने से पहले डर जाते है
● इस डर से की कहीं कोई गलती हो गई तो।
● इस बात से की कहीं हम Fail हो गए तो।
● इस बात से की कहीं हमारी Insult हो गई तो।

◆क्या जब हम छोटे थे तो गलती नहीं करते थे?
◆क्या जब हम बच्चे थे तो Fail नहीं होते थे?
◆क्या जब हम नादान थे तो हमारी Insult नहीं होती थी?

चलिए आज एक कदम आगे बढ़ते हैं कुछ नया सीखने को! 
चलिए आज एक कदम बढ़ाते हैं कुछ गलती करने को।

Saturday, September 21, 2019

Really Truth is Important?

ऐसी हमारे आपके जीवन में तमाम घटनाएं होती हैं जब हम सच और झूठ के भवर में फसकर बहोत कुछ खो देते हैं या किसी के जीवन के साथ जाने अंजाने में अन्याय करते हैं।
जरा समझने का कोशिश करते हैं।

                             

◆ अगर किसी लड़की की शादी होने से पहले ही किसी कारण वश टूट गयी हो, और उसकी दूसरी शादी होने वाली हो और कोई पिछली बातें सच-सच सबको बता दे तो क्या होगा? शायद ये शादी भी टूट जाएगी, जरा सोचने वाली बात है अगर इसे ही सच्चाई कहते हैं तो ये कितना सही है, चुनाव आपको करना है कि ये कितना ठीक है, बहुतों की जीवन में ऐसी घटनाएं होती हैं, बहोत सी ऐसी सच्चाई होती है, जिसके सामने आने से किसी की Life बर्बाद हो सकती है, मैं इन चीजों को नहीं लिख सकता लेकिन आप इस बात को अपने Life से, दूसरों के Life  से Connect करके सोच सकते हैं, देख सकते हैं, सिख सकते हैं।

◆ Thomas Edison जब बच्चे थे तो उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, उनकी Teacher उनके घर वालों को एक पत्र लिखती हैं उसमें लिखा था कि:-

 "हमें यह सूचित करते हुए बहुत खेद हो रहा है कि Thomas Edition की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और ये स्कूली शिक्षा लेने योग्य बालक नहीं है अतः Thomas को इस School से निकाला जाता है, हमें ऐसा करने से बेहद दुख है लेकिन हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है।"

Thomas की माता जी इस पत्र को पढ़ कर बहोत दुःखी हुईं और बेटे के पूछने बोलीं:-
" बेटा इस पत्र में लिखा गया है कि Thomas एक बहोत ही Extra Ordinary Student है और हमारे School में इतने योग्य Teacher नहीं हैं जो Thomas को पढ़ा सकें। इसलिए इस बच्चे को प्राम्भिक शिक्षा घर पर ही दी जाए।" और इसके बाद Thomas Edison की मां बहोत रोयीं लेकिन Thomas समझ नहीं पाए कि उनकी माँ क्यों रो रही हैं और उसके बाद उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनकी उनके घर पर ही उनकी माँ से मिली। और ये पत्र  Thomas की माँ के निधन के बाद मिली जब वो Young हो चुके थे।
आज पूरा विश्व Thomas Edition को जनता है

 हम सच-झूठ की भवर जाल में फसे हैं दूसरों को नीचे दिखाने की कोशिश में, छोटी-छोटी बातों को क्लियर करने में, हम कैसे व्यवहार करते हैं?:- "मुझे सच्चाई जानना है।" और सबको पता है कुछ अच्छा नहीं होने वाला कुछ भी जानकर। किसी बात की सच्चाई जानने से ज्यादा Important है कि सच्चाई के महत्व को समझने की कोशिश करें।
हम जितना दूसरों के बारे में सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं उसका 10% भी अपनी सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं रखते। ये 100% सच है, अगर ऐसा नहीं है तो एक बार फिर से अपनी Life के पुराने पन्नो को ध्यान से देखें।

Finally बात ये आती है कि क्या सच नहीं बोलना चाहिए?

मेरा मतलब सिर्फ इतना कहना है की जिस सच्चाई से किसी का भला ना हो सके और उसे बोलने की जरूरत भी नहीं है वो नहीं बोलना चाहिए।